जोया कस्बे में ईद मिलादुन्नबी पर निकाले गए जुलूस ए मोहम्मदी में कैबिनेट मंत्री महबूब अली का नहीं पहुंचना लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। जबकि हर बार वह यहीं से जुलूस ए मोहम्मदी की शुरूआत करते थे। हर कोई उनकी अनुपस्थिति को शौकत पाशा हत्याकांड के बाद तुर्क बिरादरी में फैली नाराजगी से जोड़कर देख रहा था। इस बार तो त्योहार पर छपे उनके पोस्टरों से उनकी फोटो भी नदारद थी।
जोया से होकर निकलने वाले जुलूस ए मोहम्मदी में कई गांवों के लोग शामिल होते हैं। आसपास के गांवों से निकलने वाले जुलूस भी इसमें आकर शामिल हो जाते है। अधिकतर गांव तुर्क बहुल हैं। इससे ये जुलूस जिले के सबसे बड़े जुलूस का रूप ले लेता है। सोमवार को भी जुलूस में लगभग 50 हजार लोग शामिल थे। तमाम राजनीति दलों के नेता और प्रतिनिधि यहां लोगों को बधाई देने पहुंचते हैं।
सोमवार को भी निकाले गए जुलूस को बधाई देने के लिए नौगावां सादात से सपा विधायक अशफाक अली खां, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मंडल प्रभारी राशिद अल्वी, पूर्व विधायक मुन्ना आकिल, कांग्रेस नेता सलीम खां और खुशतर मिर्जा, बसपा नेता नौशाद अली, एआईएमआईएम नेता शमीम अहमद तुर्क, पीस पार्टी के रिजवान अहमद तुर्क, चेयरमैन मो. यामीन, मो. इस्लाम, जिपं सदस्य हाजी इफ्तिखार आदि पहुंचे थे, लेकिन इस बार कैबिनेट मंत्री महबूब अली का न पहुंचना लोगों के बीच चर्चा बन गया।
हर कोई उनकी गैरमौजूगी को शौकत पाशा हत्याकांड से जोड़ रहा था। उनका कहना था कि नाराजगी को लेकर इस बार मंत्री ने त्योहार पर अपने पोस्टर भी कम लगवाए थे। जो लगे थे उसमें मंत्री के फोटो नहीं थे। इसी कारण उन्होंने यहां आने से भी परहेज किया। यहां बताते चलें कि प्रत्येक वर्ष निकलने वाले जुलूस में कैबिनेट मंत्री शिरकत करते थे, लेकिन इस दफा हवा का अलग ही रुख है।