अमरोहा। सरकारी जमीनों की श्रेणी बदलकर किए गए पट्टों की जांच की रिपोर्ट 15 दिन बाद भी जिले की किसी भी तहसील से प्रशासन को नहीं मिली है। इससे जांच प्रक्रिया की गति पर सवाल उठने लगे हैं।
हसनपुर और मंडी धनौरा तहसील क्षेत्रों में सरकारी भूमि के पट्टा आवंटन में अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद डीएम डॉ. नितिन गौड़ ने वर्ष 1987 से 2000 के बीच हुए सभी पट्टों की जांच के निर्देश दिए थे। प्रत्येक तहसील में एसडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित कर अभिलेखों की जांच और मौके पर सत्यापन कराने को कहा गया था।
निर्देश जारी होने के 15 दिन बाद भी किसी तहसील से जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। इससे जांच की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जांच की धीमी रफ्तार को लेकर चर्चाएं हैं, जबकि एक तहसील में अभी तक जांच शुरू न होने की भी चर्चा है।
अब प्रशासन की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
करीब 2880 बीघा जमीन पर 500 पट्टे
हसनपुर तहसील के आदमपुर, रहरा, दढ़ियाल और गंगेश्वरी क्षेत्र में चरागाह, झील और अन्य सार्वजनिक उपयोग की करीब 2880 बीघा सरकारी जमीन की श्रेणी बदलकर लगभग 500 पट्टे आवंटित किए गए थे। जमीन विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा बाजार मूल्य के हिसाब से इसकी कीमत करीब 1.44 अरब रुपये आंकी गई है।
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अभ्यारण्य की 4900 बीघा जमीन भी जांच के घेरे में
मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में अभ्यारण्य (सेंचुरी) के लिए आरक्षित करीब 4900 बीघा सरकारी भूमि को लगभग 800 पट्टों के जरिए खुर्दबुर्द किए जाने का मामला भी सामने आया है। इस जमीन की मौजूदा बाजार कीमत करीब एक अरब रुपये बताई जा रही है। इस मामले को भी डीएम ने जांच के दायरे में शामिल किया है।
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अभी पट्टों की जांच का काम चल रहा है। सभी एसडीएम अपनी-अपनी तहसीलों में पट्टों की बारीकी से जांच कर रहे हैं। जल्द ही इस कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।
-धीरेंद्र प्रताप सिंह, एडीएम न्यायिक