पतित पावनी मां गंगा के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती जा रही है। मेला में आस्था, उमंग और पर्यटन का संगम श्रद्धालुओं को भा रहा है। करीब दस दिन तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में हर कोई एक उद्देश्य के लिए पहुंचता है। प्रशासनिक आंकड़ों की मानें तो पिछले 11 साल में श्रद्धालु की संख्या 23 लाख गढ़ गई है। साल 2014 में कार्तिक पूर्णिमा पर 15 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी जबकि इस बार यह संख्या 38 लाख पहुंच गई है।
कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी धाम गंगा घाट पर लगने वाले ऐतिहासिक मेले का काफी महत्व है। यहां ऊंच-नीच, अमीर-गरीब, छोटे-बड़े सबका एक नजरिया रहता है। साल 2014 में कार्तिक पूर्णिमा पर 15 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी जबकि 2015 में भी 15 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। साल 2016 में 15 लाख श्रद्धालुओं ने मां गंगा के आंचल में स्नान कर पुण्य लाभ कमाया। 2017 में 16 लाख व 2018 में यह संख्या 18 लाख पहुंच गई। 2019 में 20 लाख श्रद्धालु ने पतित पावनी मां गंगा ने स्नान कर सुख शांति की कामना की थी। हालांकि, साल 2020 में कोरोना महामारी का ग्रहण लगा था जिस कारण न तो मेला लगा और न श्रद्धालु गंगा में स्नान कर सके लेकिन 2021 में कोरोना के डर के बीच 21 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया था।
साल 2022 श्रद्धालुओं की संख्या चार लाख बढ़ गई थी। इस साल कार्तिक पूर्णिमा पर 25 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया था लेकिन इसके बाद वर्ष 2023 और साल 2024 में 35-35 लाख श्रद्धालु स्नान करने पहुंचे थे। इस बार रिकार्ड तोड़ श्रद्धालुओं मेले में पहुंचे। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल कार्तिक पूर्णिमा पर 38 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया है जो पिछले साल के सापेक्ष तीन लाख अधिक है। डीएम निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि मेला सकुशल संपन्न हो गया है। आगे भी श्रद्धालुओं का ये कारवां बढ़ने का अनुमान है।
किस साल कितने श्रद्धालु पहुंचे श्रद्धालुओं की संख्या
201415 लाख
2015-15 लाख
2016-15 लाख
2017-16 लाख
2018-18 लाख
2019-20 लाख
2021-21 लाख
2022-25 लाख
2023-35 लाख
2024-35 लाख
2025-38 लाख