अमरोहा। कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सपूत अरविंद सिंह के पिता मुख्त्यार सिंह (70) का बृहस्पतिवार रात निधन हो गया। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव मिलक छावी समेत आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया। गंगा किनारे अंतिम संस्कार किया गया।
जिला मुख्यालय से करीब दस किलोमीटर दूर स्थित गांव मिलक छावी निवासी मुख्त्यार सिंह के पांच बच्चों में शहीद अरविंद सिंह सबसे बड़े थे। कम उम्र में ही अरविंद पर देशभक्ति का ऐसा जुनून सवार हुआ कि वर्ष 1996 में भारतीय सेना की 22 ग्रेनेडियर्स बटालियन में भर्ती हो गए। अप्रैल 1999 में वह दो माह की छुट्टी पर घर आए थे। 13 जून 1999 को ड्यूटी पर लौटते समय कारगिल युद्ध शुरू हो गया।
परिजनों ने उन्हें कुछ दिन और रुकने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने देश सेवा को सर्वोपरि बताते हुए लौटना उचित समझा। कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन विजय में 22 ग्रेनेडियर्स की ब्रावो कंपनी को प्वाइंट 5287 पर कब्जा करने की जिम्मेदारी मिली थी। 25-26 जून 1999 को भीषण बमबारी के बीच ग्रेनेडियर अरविंद सिंह ने साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के 21 जवानों को मार गिराया।
इस दौरान उनके सिर और सीने में 11 गोलियां लगीं और वह मातृभूमि के लिए शहीद हो गए। 29 जून 1999 को उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा था। शहीद के छोटे भाई धर्मेंद्र सिंह उर्फ मल्लू ने बताया कि उनके पिता मुख्त्यार सिंह पिछले तीन-चार माह से कैंसर से पीड़ित थे। जिनका उपचार चल रहा था। बृहस्पतिवार की रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार तिगरी गंगा घाट पर किया गया। निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में शोक का माहौल है और हर आंख नम दिखाई दे रही है। जानकारी मिलते ही परिचित,रिशतेदार और आसपास के लोगों का सात्वंना देने के लिए तांता लगा रहा। संवाद