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साथ जिए और साथ ही छोड़ी दुनिया: बड़ी गहरी थी दोस्ती, बद्रीनारायण की चिता के पास ही थम गईं जयपाल की सांसें

Sun, 13 Sep 2026 10:52 AM IST
Akash Dubey संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी धनौरा (अमरोहा)

सार

शहबाजपुर गुर्जर के बद्रीनारायण (65) की मौत हुई। उनके दोस्त जयपाल सैनी (60) की भी अंतिम संस्कार में दोस्त की चिता पर मृत्यु हो गई। दोनों की मौत के बाद इलाके में उनकी गहरी दोस्ती की चर्चा है।
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दो दोस्तों ने एक साथ छोड़ी दुनिया - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के अमरोहा जनपद के गांव शहबाजपुर गुर्जर से बद्रीनारायण (65) और जयपाल सैनी (60) की दोस्ती की ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी सामने आई जो टूटते रिश्तों के इस युग में सुनने और पढ़ने को बहुत ही कम मिलती है। यह दोनों दोस्त जीवन भर साथ जिए और एक साथ ही दुनिया को अलविदा भी कह गए। बद्रीनारायण की मौत के बाद शुक्रवार को उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने तिगरी धाम पहुंचे जयपाल सैनी की सांसें दोस्त की चिता के पास ही थम गईं।

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शहबाजपुर गुर्जर निवासी बद्रीनारायण पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। परिवार वालों का कहना है कि इस दौरान उनके दोस्त जयपाल सैनी रोज हाल जानने घर आते थे। गुरुवार की शाम को बद्रीनारायण का निधन हो गया था। शुक्रवार को परिवार वाले और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए तिगरी धाम पहुंचे। बद्रीनारायण के दोस्त जयपाल सैनी भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए थे। 

अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन गंगा तट पर अस्थियां इकट्ठा करने लगे। जयपाल भी अपने दोस्त की अस्थियां एकत्र कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जयपाल सैनी की तबीयत बिगड़ी और वह चिता के पास ही गश खाकर गिर पड़े। साथ मौजूद परिवार वालों ने उन्हें उठाकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। 

आनन-फानन में ग्रामीण जयपाल को गजरौला में एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक ही दिन में दो दोस्तों की मौत की खबर से शहबाजपुर गुर्जर गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जयपाल की मौत की खबर जब उनके परिजनों को मिली तो परिवार में भी कोहराम मच गया। गांव में दिनभर दोनों दोस्तों की वर्षों पुरानी दोस्ती और अंतिम समय तक साथ निभाने की चर्चा होती रही। 

ग्राम प्रशासक जितेंद्र सैनी ने बताया कि बद्रीनारायण और जयपाल की दोस्ती पूरे गांव में मिसाल थी। दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख में हमेशा साथ खड़े रहते थे। किसी ने सोचा भी नहीं था कि दोस्त की अंतिम विदाई देने पहुंचे जयपाल खुद भी उसी गंगा तट पर दुनिया को अलविदा कह देंगे। गांव के लोगों के बीच यह घटना दोस्ती के अंतिम समय तक साथ निभाने की भावुक मिसाल बन गई।
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बद्री नारायण के बेटे चंद्रपाल का कहना है कि जयपाल चाचा और पिता जी की पुरानी दोस्ती थी। पारिवारिक रिश्ते थे। कोई ऐसा दिन नहीं बीतता था कि जब दोनों की मुलाकात न होती हो। दोनों के एक-दूसरे से अपनी सभी बातें साझा करते थे। उनकी दोस्ती गांव में एक मिसाल थी।
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