मौलाना शरीफ बाराबंकी ने जिंदगी को दीन के मुताबिक गुजारने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पास जो बेहतर है, वह लोगों तक पहुंचे और उसको भी इससे फैज हासिल हो। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर इस काम के लिए बेहद आसान हो चुका है, अब टेक्नोलॉजी से अपनी बात को बहुत जल्द दूसरे लोगों तक पहुंचाया जा सकता है लेकिन, इससे पहले नबियों को इस काम में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अच्छी बातों को दूसरे लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्हें मीलों का सफर पैदल करना पड़ता था। मुफ्ती मोहम्मद असलम ने दीनी तालीम पर जोर दिया। कहा कि आज कल के माहौल के लोगों में बच्चों को सिर्फ और सिर्फ दुनियावी तालीम दिलाने का माहौल सा बन गया है, जबकि दुनियावी तालीम के साथ दीनी तालीम का हासिल करना बेहद जरूरी है। मुफ्ती रिफाकत ने शादियों में फिजूलखर्ची न करने पर जोर दिया।
मुफ्ती नौशाद ने निकाह पढ़ाए। इज्तिमा के समापन पर मुफ्ती मोहम्मद असलम ने खुसूसी दुआ कराई तो पंडाल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। सदारत मास्टर जाकिर हुसैन और सरपरस्ती कारी मोहम्मद यामीन ने की। वहीं, दुआ में शामिल होने के लेकर लोगों में सुबह से ही जज्बा देखने का मिला। दिन निकलते ही पंडाल भर गया। वहीं, दुआ के दौरान दोपहर तक बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा, दुकानें बंद रहीं।
वालंटियर बनकर संभाली यातायात व्यवस्था
एक तरफ भारी भीड़ जुटने के मद्देनजर पुलिस-प्रशासन भी सुबह से ही अलर्ट रहा। इज्तिमा संपन्न होने के बाद शहर की सड़कों पर ट्रैफिक का संचालन कराने में पुलिसकर्मी अलर्ट रहे। जबकि, पुलिस के अलावा इज्तिमा में शामिल मुस्लिम युवकों ने वालंटियर बनकर खुद यातायात व्यवस्था संभाली। बिजनौर रोड स्थित चूना भट्ठी से लेकर अतरासी रोड पर जगह-जगह वालंटियर बनकर युवा वर्ग पुलिस के साथ यातायात व्यवस्था संभालने में लगा रहा। जिससे शहर में जाम नहीं लगा।