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तालाबों की तो छोड़िए, यहां नदी पर कब्जा कर बना लिए मकान

Sun, 14 May 2017 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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जोया क्षेत्र में सोत नदी पर कब्जा कर बनाए गए मकान। - फोटो : amar ujala
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तालाबों की छोड़िए, यहां तो नदियों पर कब्जा कर मकान बना लिए गए हैं, फसलें उगाई जा रहीं। प्रदेश में जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से अवैध कब्जों को हटवाने के लिए दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी की ढिलाई के कारण कोई भी कब्जा नहीं हटाया जा रहा है।
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सवाल उठा है कि ऐसी बेदम व्यवस्था में आखिरकार नदियों व तालाबों को कोई कैसे कब्जा मुक्त करा सकेगा। हालांकि मुख्यमंत्री की सख्ती के चलते नदी, तालाब, सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने को एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है।       

प्रशासन की उदासीनता के चलते जिले में भूमाफिया हावी हैं। जिले में सबसे अधिक जमीनों पर अवैध कब्जों के मामले हैं। भूमाफिया ने शहर के पनवाड़ी और कुशक तालाब को भी नहीं छोड़ा है। दोनों तालाबों के काफी क्षेत्रफल पर कब्जा कर लिया है।
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रातों रात तालाब पाट कर अवैध निर्माण कराए गए हैं। भूमाफिया ने नदियों को भी नहीं छोड़ा है। सोत नदी की जमीन पर खेती हो रही हैं। तो कहीं इमारतें खड़ी हैं। कई क्षेत्रों में तो सोत नदी का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है। जोया में सोत नदी के पुल की चौड़ाई चालीस फीट है।

इससे कुछ दूरी पर नदी की चौड़ाई मात्र दस फीट रह गई है। जोया में सोत नदी में इमारतें खड़ी हैं। प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ नोटिस जारी करने तक ही सीमित रही। आज तक सोत नदी से अवैध निर्माणों को नहीं हटवाया गया। अवैध निर्माण करने वालों को हौसले बुलंद हैं।

असगरीपुर, फतहपुर आदि क्षेत्रों में सोत नदी की सैकड़ों बीघा जमीन पर खेती की जा रही है। पलौला समेत कई गांवों में सोत नदी का अस्तित्व ही मिटा दिया गया है। यहां तक भू अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई है।

जिस स्थान पर नक्शे में नदी दर्ज थी, कई स्थानों पर आज खेजी की जमीन दर्ज है।सोत नदी को कब्जा मुक्त कराने की प्रशासन की कार्रवाई परवान नहीं चढ़ी। सोत नदी की खुदाई का कार्य अधर में लटक हुआ है। नदी खुदाई को जो स्थान चिंहित किए गए थे, वहां खुदाई नहीं हो सकी। पिछले एक साल से प्रशासन से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।        

ग्राम पंचायतों के तालाबों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं। तालाबों का अस्तित्व में खतरे में पड़ गया है। तालाबों पर अवैध कब्जे कर पाट लिए गए हैं। उनके पर अवैध निर्माण कर भवन, दुकान खड़ी कर दी हैं। ऐसा नहीं प्रशासन और पुलिस को इसकी जानकारी न हो, जानकर अंजान बने हुए हैं। ग्राम समाज की जमीनों पर सबसे अधिक अवैध कब्जे की शिकायतें मिलती हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
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