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क्रेडिट कार्डों के ब्याज के नाम पर किसानों के खातों से की करोड़ों की अवैध कटौती

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अमरोहा। प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड, पशु कार्ड व अन्य कृषि ऋण के 14 लाख से अधिक खातों से करोड़ों रुपये की अवैध कटौती का मामला सामने आया है। एक किसान नेता द्वारा इस मामले को उठाए जाने के बाद बैंक ने इसे तकनीकी खामी का परिणाम बताते हुए खाताधारकों को धन वापसी का सिलसिला शुरू करने की बात कही है।
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बैंक स्तर पर इस अवैध कटौती की चपेट में आए भाकियू भानु के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चौधरी दिवाकर सिंह ने मामले को गंभीरता से उठाते हुए उच्चाधिकारियों का इस ओर ध्यान दिलाया। सिंह के मुताबिक उनके बैंक द्वारा उनके 28 हजार रुपये की कटौती की गई। इसे लेकर पूछताछ की तो पता चला कि बैंक की तमाम शाखाओं में किसानों से जुड़े विभिन्न क्रेडिट कार्डों के सापेक्ष ब्याज के नाम पर धन की अवैध कटौती की गई। किसान नेता का कहना है कि बैंक की सभी शाखाओं में 8.26 किसान क्रेडिट कार्ड और 6.13 लाख पशु व अन्य ऋण कार्ड हैं। लगभग सभी के खातों से 23 अगस्त 2019 के बाद अवैध कटौती की गई है। जिस किसान से सात प्रतिशत ब्याज वसूला जाना था, उससे 12 से 14 प्रतिशत ब्याज की वसूली की गई है। उनका दावा है कि कुल मिलाकर 14 लाख से अधिक खाताधारकों से अवैध कटौती कर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि इस गड़बड़ी की चपेट में आए किसान संबंधित बैंक शाखाओं के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उन्हें वहां से संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा।
किसान नेता का कहना है कि प्रभावित किसानों को लेकर जब मुरादाबाद में बैंक के महाप्रबंधक से मुलाकात की तो उन्होंने माइग्रेशन (अन्य बैंक के विलय) के समय की तकनीकी त्रुटि की वजह से ऐसा होने की बात कही। साथ ही 1,90 लाख खातों से काटे गए 67 करोड़ रुपये वापस करने की बात कही है। अन्य खातों में तीन दिन के भीतर धन वापसी कराने का आश्वासन भी दिया है।
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एक साल में बदले तीन सॉफ्टवेयर
अमरोहा। किसान नेता चौधरी दिवाकर सिंह का कहना है कि बैंक ने एक साल में तीन सॉफ्टवेयर अपडेट किए गए थे। उनका आरोप है कि किसानों के धन से ब्याज के नाम पर अवैध कटौती का खेल करने के लिए सॉफ्टवेयर तीन बार बदले गए। प्रति किसान औसतन 200 रुपये से लेकर 9 हजार 700 रुपये की तक की अवैध कटौती की गई है।
किसान नेता ने सवाल उठाया है कि माइग्रेशन के समय की तकनीकी खामी से अगर किसानों के खातों से कटौती हुई तो किसी किसान के खाते में ज्यादा धन क्यों नहीं पहुंच गया। संवाद
आरोप कोई भी किसी पर लगा दे, ऐसा कुछ नहीं हैं। माइग्रेशन के दौरान सॉफ्टवेयर चेंज होता है, तो इधर-से उधर खाते जाते हैं, ऐसे में त्रुटियां हो जाती हैं, बाद में जो त्रुटियां सामने आतीं हैं, उनका निराकरण हो जाता है।
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- राजकुमार सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रथमा यूपी ग्रामीण बैंक, अमरोहा
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