हसनपुर (अमरोहा)। खाद के बढ़े दाम और किल्लत की वजह से किसानों को गेहूं की बोआई में परेशानी का सामना करना पड़ा है। समितियों पर किसानों को डीएपी के विकल्प के तौर पर एनपीके खाद उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों की जेब पर खर्च बढ़ रहा है।
डीएपी 50 किलो का बोरा 1350 का है जबकि एनपीके 50 किलो बोरा 1950 का है। इस तरह, डीएपी के स्थान पर एनपीके खरीदने से प्रति बोरा 600 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उर्वरक की अचानक बढ़ी कीमत से किसान बहुत परेशान हैं। सहकारी समिति शाहपुर कला पर डीएपी खाद का स्टॉक पूरी तरह से खत्म हो चुका है। सहकारी समिति दोरारा और ढबारसी पर भी डीएपी उपलब्ध नहीं है।
हसनपुर सहकारी समिति के प्रभारी ज्ञान सिंह ने बताया कि डीएपी का स्टॉक शुक्रवार को ही खत्म हुआ है, और अब उसकी जगह किसानों को एनपीके दिया जा रहा है। किसानों ने शासन-प्रशासन से जल्द से जल्द सहकारी समितियों पर डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि गेहूं की बुवाई में कोई देरी न हो और उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।