गाजर का हलवा खाने से फूड प्वाइजनिंग के शिकार हुए लोगों की सेहत में सुधार है। अस्पतालों से मरीजों को छुट्टी मिल गई है। अब सभी की देखभाल घर पर हो रही है। बीमार लोगों का स्वास्थ्य बेहतर होने के बाद जिला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम मावा, खोवा, छेना, पनीर, रसगुल्ला और बालुसाई के सैंपल जांच के लिए लैब भेजे हैं।
डिडौली गांव रहने वाले सराफ कुलदीप गुप्ता के पिता विनेश गुप्ता की शुक्रवार को पुण्यतिथि थी। खाने पर रिश्तेदार, परिचित और ग्रामीणों को बुलाया गया था। दोपहर में लोगों ने कई तरह के पकवानों के साथ गाजर का हलवा भी खाया, जिसके बाद महिलाओं और बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। अचानक उन्हें उल्टी, पेट दर्द और चक्कर आने की शिकायत हुई। एक के बाद एक बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने पर पुण्यतिथि कार्यक्रम में शामिल लोगों में हड़कंप मच गया।
आनन फानन बीमार लोगों को आसपास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने लोगों को फूड प्वाइजनिंग होने का दावा किया। यह भी बताया गया कि गाजर का हलवा नकली दूध और नकली मावे से तैयार किया गया था। जिसे खाने के बाद लोगों को फूड प्वाइजनिंग हुई थी। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि फूड प्वाइजनिंग के बीमार लोगों का इलाज निजी अस्पतालों में चल रहा था। सेहत में सुधार होने पर सभी की छुट्टी कर घर भेज दिया गया है।