अमरोहा। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने टीबी ग्रस्त बच्चों को गोद लेकर उनकी बीमारी को दूर करने का बीड़ा उठाया है। लेकिन मैडम अमरोहा के टीबी के मरीजों को दवा, पर्चा और जांच कराने के लिए दो बिल्डिंगों के तीन चक्कर लगाने पड़ते हैं। जिला अस्पताल परिसर में टीबी अस्पताल तो है, लेकिन यहां न तो मुकम्मल जांच होती और न दवा की पर्याप्त व्यवस्था है। इस अस्पताल में बलगम की केवल दो जांच होती हैं। जबकि अन्य जांच, दवा और पर्चा के लिए दूसरी बिल्डिंग में जाना पड़ता है।
सूबे की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी अधिकारियों को टीबी ग्रसित बच्चों को गोद लेने के निर्देश दिए थे। जिससे केंद्र सरकार का टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना वर्ष 2025 तक पूरा हो सके। इसके तहत सूबे के कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान, डीएम उमेश मिश्र, एसपी डॉ. विपिन ताडा, एसीएमओ डा. गोपीलाल समेत कई अधिकारियों ने टीबी मरीज को गोद लिया। डीएम उमेश मिश्र ने शहर के जिम्मेदार और सामाजिक कार्य करने वालों लोगों से ऐसे बच्चों को गोद लेने की अपील की है। सरकार ने भी टीबी ग्रसित लोगों पर पांच सौ रुपये प्रति माह देना तय किया है। जिससे उनका इलाज हो सके। लेकिन जिला अस्पताल परिसर में लाखों की लागत से तैयार टीबी अस्पताल अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। इस अस्पताल में बलगम की केवल दो जांच होती हैं। जबकि अन्य जांच दूसरी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर होती हैं। कलचर के लिए एमडीआर जांच अलीगढ़ में करानी पड़ती है। इतना ही नहीं, सबसे पहले मरीज को जिला अस्पताल पर्चा बनाने के लिए लाइन में लगना पड़ता है। इसके बाद वह टीबी अस्पताल में पहुंचता है। अगर इस अस्पताल में जांच हुई तो ठीक वरना फिर उसी बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर जांच कराने के लिए जाना पड़ता है। इसके बाद मरीज रिपोर्ट लेकर टीबी अस्पताल में जाता है। यहां डॉक्टर दवा देते हैं। अगर टीबी ग्रसित मरीज को खांसी-जुकाम या बुखार की दवा लेनी पड़े तो उसे फिर उसकी बिल्डिंग में जाना पड़ता है।
टीबी अस्पताल में अभी दो जांच होती हैं। टीबी की दवा भी दी जाती है। अभी इस अस्पताल में पर्चा नहीं बनता है। लिहाजा मरीज को दूसरे अस्पताल में जाना पड़ता है। इन दो जांचों के अलावा अगर दूसरी जांच की जाती है तो उसके लिए भी मरीज को जिला अस्पताल के पैथोलॉजी लैब भेजा जाता है।
- डॉ मुमताज अंसारी, प्रभारी टीबी अस्पताल।