अमरोहा। हजरत इमाम हुसैन अलै. के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम की शहादत पर मजलिस का आयोजन किया गया। शबीहे ताबूत बरामद करते हुए नौहख्वानी के बीच सीनाजनी करते हुए शहादत को याद किया।
मोहल्ला मंडी चौब स्थित अजाखाना मोहम्मद युसूफ में सफीरे हुसैन हजरत मुस्लिम के गम का आयोजन किया गया। मौलाना हैदर मेहंदी ने बताया कि पैगम्बर-ए-इस्लाम के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने जब ये देखा कि यजीद दीने इस्लाम को मिटाने के लिए हिंसा, अहंकार, अन्याय, अय्याशी तथा अरबों में पैगम्बरे इस्लाम से पूर्व में फैली बुराईयों को अपना रहा है तो हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कर्बला में कुर्बानी देकर न केवल इस्लाम को बचाया बल्कि आलम-ए-इंसानियत को भी बचा लिया।
उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम बिन अकील थे। इमाम हुसैन ने हजरत मुस्लिम को कूफे में अपना सफीर यानि शांति दूत बनाकर भेजा था। कूफे वालों ने इमाम हुसैन को खत भेज कर बुलवाया था। इमाम हुसैन ने कूफे के माहौल का जायजा लेने के लिए हजरत मुस्लिम को पहले वहां भेजा था, लेकिन कूफे में जालिमों ने उन पर जुल्म शुरू कर दिए। मसायब का जिक्र सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं। मजलिस के बाद हजरत मुस्लिम का ताबूत बरामद हुआ। नौहाखानी और सीनाजनी भी हुई। वहीं, घरों में नजर-ओ-नियाज का सिलसिला चलता रहा।