अमरोहा। लोगों की सहूलियत के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में बनाए गए पंचायत भवनों में कहीं पर ताले लटके हैं तो कहीं पर लोगों को सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में लोगों को पेंशन आवेदन और आय, जाति या अन्य प्रमाणपत्र बनवाने के लिए जनसेवा केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
डिजिटल इंडिया के तहत सभी कार्य ऑनलाइन किए जाने के बाद शासन ने ग्रामीणों की सुविधा के लिए पंचायत स्तर पर बने मिनी सचिवालय बनाए हैं लेकिन सरकार की मंशा के अनुरूप यहां ग्रामीणों को सुविधाएं मुहैया नहीं हो पा रही हैं।
जिले में 576 ग्राम पंचायतों में भवन के साथ साथ पंचायत सहायक भी नियुक्त किए हैं। प्रत्येक पंचायत भवन में एक-एक कंप्यूटर, इंटरनेट सुविधा व अन्य जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए ताकि पंचायत सहायक गांव के कार्यों की ऑनलाइन फीडिंग, भुगतान, पेंशन फार्म, आय, जाति, मूलनिवास, जन्म और मृत्यु प्रमाण आदि प्रमाणपत्र का आवेदन कर उन्हें उपलब्ध करा सकें लेकिन अधिकांश सचिवालयों पर ताला लगा होने से ग्रामीणों को इनकी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
लापरवाही और उदासीनता के कारण इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ग्रामीणों को जनसेवा केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ता है। जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। अमरोहा ब्लॉक के गांव में खेतापुर में 15 दिनों से कंप्यूटर खराब होने के कारण लोगों के काम नहीं हो पा रहे हैं।
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फरौटा के सचिवालय पर लटका मिला ताला
हसनपुर। सरकारी योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए बनाए गए ग्राम सचिवालय अधिकांश गांवों में बंद रहते हैं जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोपहर 12 बजे सांथलपुर अधेक की मढैया और 12:30 बजे ग्राम फरौटा के ग्राम सचिवालय पर ताला लटका मिला। फत्तेहपुर अधेक में भी 12:30 बजे यही हाल था। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सचिवालय अक्सर बंद ही रहता है। वहीं, दोपहर एक बजे गांव दमगढ़ा में ग्राम सचिवालय खुला तो मिला लेकिन वहां तैनात पंचायत सहायक गायब थे। ग्राम सचिव मोहम्मद अनस ने बताया कि सहायक छुट्टी पर हैं। गांव बुरावली में 12 बजे ग्राम सचिवालय खुला मिला, जहां एक कर्मचारी ने बताया कि पंचायत सहायक विभागीय बैठक में गए हैं।
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सभी पंचायत सचिवालयों पर पंचायत सहायकों को बैठने के निर्देश दिए गए हैं। अगर पंचायत सहायक समय से नहीं बैठ रहें हैं, तो इसमें जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी। - पारूल सिसाेदिया, डीपीआरओ