अमरोहा। किसी समय में खुशहाल अमरोहा के हैंडलूम कारोबारियों को आज सुविधाओं की दरकार है। पहले न कच्चा माल मिलने में दिक्कत थी और न ही तैयार माल को बेचने के लिए बाजार की किल्लत। लेकिन, गुजरते समय के बाद इससे जुड़े लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कुछ का इस कारोबार से मोहभंग हुआ तो कुछ लोग अभी भी अपने इस पुश्तैनी कारोबार को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। लेकिन, सरकार की ओर से सुविधाएं न मिलने टीस इन कारोबारियों को अभी भी है।
एक जमाने में अमरोहा हैंडलूम का हब हुआ करता था। बड़ी तादाद में लोग इस कारोबार से जुड़कर अपना जीवन यापन करने में लगे हुए थे। उस समय सरकार भी इन कारोबारियों को खासी सुविधाएं मुहैया कराया करती थी। हैंडलूम बुनकरों को न तो कच्चा माल खरीदने में परेशानी आती थी ओर न ही तैयार माल को बेचने के लिए बाजार की किल्लत थी। लेकिन, समय बदला ओर धीरे-धीरे हालात भी बदलते चले गए।
स्थानीय स्तर पर न तो कच्चा माल ही मिल पा रहा है, और न तैयार माल को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध हो पा रहा है। जो, इस कारोबार से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी समस्या है। हैंडलूम कारोबारियों ने सरकार से कम से कम उनके लिए बाजार उपलब्ध कराने की मांग की है।
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आज अमरोहा की पहचान भले ही ढोलक के कारोबार के रूप में होती है। पुराने समय में इस शहर की पहचान हैंडलूम नगरी के रूप में हुआ करती थी। लेकिन, दुर्भाग्यवश आज यह कारोबार अमरोहा से सिमटता जा रहा है। इसको बचाए रखने के लिए सरकार को हैंडलूम कारोबारियों को बाजार मुहैया कराना होगा। जिससे इस कारोबार और अमरोहा के इस हुनर को बचाकर रखा जा सके। - परवेज आरिफ टीटू, अध्यक्ष, नेशनल बुनकर हथकरघा सहकारी समिति
- हैंडलूम को बचाए रखने के लिए सरकार को इसकी और ध्यान देना होगा। इससे जुड़े कारोबारियों को माल बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराना होगा। हैंडलूम कारोबारियों से एक-एक कर सारी सुविधाओं को खत्म कर दिया गया है, जो ठीक नहीं है। पहले रेलवे की चादर भी हैंडलूम की सप्लाई हुआ करती थीं। लेकिन, अब पावरलूम के आने से हैंडलूम को झटका लगा है। टेक्नोलॉजी के आगे देसी हुनर पिछड़ रहा है। इसको बचाने के लिए सरकार को आगे आना होगा। - हसन आरिफ अंसारी, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश बुनकर समाज
- स्थानीय स्तर पर कोई सुविधा हैंडलूम कारोबारियों को नहीं मिल पा रही है। कच्चा धागा भी पानीपत से लाना पड़ता है। उसके बाद तैयार माल के खरीदार भी अधिक नहीं मिल पाते। जिससे औसत मुनाफा निकालना भी मुश्किल होता है। इस कारोबार को बचाए रखने के लिए सरकार को कम से कम बाजार की उपलब्धता करानी होगी।- शकील अहमद अंसारी, नगर अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश मोमिन कॉन्फ्रेंस
- हैंडलूम कारोबार को बचाए रखने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। एक तो कच्चा माल नहीं मिल पाता है। दूसरा खरीदार भी नहीं मिलते। सरकार को हैंडलूम कारोबारियों के लिए सुविधाओं को बढ़ाना होगा। तभी इस कारोबार को आगे बढ़ाया जा सकता है। - फरमान अहमद, हैंडलूम कारोबारी