जनपद में लोगों को सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के लिए साल 2018 में 26 जन औषधि केंद्र खोले गए थे। इनमें से अब तक 12 पर ताला लटक गया है। वर्तमान में 14 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इन पर भी खांसी, बुखार, जुकाम व शुगर की दवाएं तो आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन आंखों व दातों की दवा के अलावा हार्ट, कैंसर व गंभीर बीमारियों की दवा नहीं मिल पाती है। जबकि, जन औषधि केंद्रों पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं होनी चाहिए।
शुरुआत में जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की भरमार थी। मरीज व तीमारदारों को भी इसका फायदा मिल रहा था, लेकिन सरकार की योजना पर दवा की कमी और सरकारी व निजी डॉक्टरों के कमीशन का खेल पलीता लगा रहा है। जन औषधि योजना के तहत इन केंद्रों का संचालन शुरू होने के बाद भी निजी व सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों ने कमीशनखोरी के चलते जेनेरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा है। इसके चलते जन औषधि केंद्रों संचालकों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा, जिस पर जिले में संचालित केंद्र अब बंद होने की कगार पर पहुंचने लगे हैं। स्थिति यह है कि जिले में 12 जन औषधि केंद्र पूरी तरह बंद हो गए हैं।
जन औषधि केंद्रों पर 281 दवाएं ही उपलब्ध
केंद्र सरकार ने सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू कराया था। जिला अस्पताल में भी जन औषधि केंद्र संचालित है। इन केंद्रों पर विभिन्न बीमारियों की 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने का दावा था, लेकिन मौजूदा समय में केवल 281 दवाएं ही उपलब्ध हैं। इनका भी स्टॉक समाप्त होने वाला है। चर्चा तो यह है कि संचालक निजी कंपनियों की दवाएं बेचने लगे हैं।
कारगार हैं जेनरिक दवाएं
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चरन सिंह ने बताया कि जेनरिक दवाएं कारगार हैं। ब्रांडेड दवा की तरह ही यह जेनरिक दवा भी काम करती हैं। फर्क इतना है कि ब्रांडेड दवाओं की मार्केटिंग ज्यादा होती है। इसलिए लोगों को लगता है कि वह दवा ज्यादा कारगार है। जेनरिक दवा भी उसी तरह काम करती है, जैसे ब्रांडेड दवाएं। लोगों में भ्रम रहता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा बेहतर हैं लेकिन ऐसा है नहीं।
दवाएं मिल नहीं पा रही
जन औषधि केंद्र पर हृदय रोग की दवाएं लेने के लिए पहुंचे योगेंद्र सिंह को दवाओं के उपलब्ध नहीं होने की जानकारी हुई तो वह लौटने लगे। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मेरठ में जन औषधि केंद्र से दवाई 350 रुपये में मिल जाती है। यही दवाई किसी अन्य मेडिकल से लेंगे तो करीब 650 रुपये मे मिलेगी।
90 प्रतिशत तक मिलती है छूट
जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली जेनेरिक दवाएं निजी मेडिकल स्टोर की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक कम दामाें में मिलती है। जिला अस्पताल आने वाले अधिकांश मरीज यही से दवाएं लेते हैं, क्योंकि यहां दवाओं की कीमत बहुत कम होती है।
- जन औषधि केंद्र पर दवाओं का भंडारण में कमी आ रही है, क्योंकि कंपनी द्वारा कुछ दवाएं समय से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जिसके कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर जाकर महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे मरीजों को जन औषधि केंद्र का पूरा लाभ मिल सके।
- गौरव कुमार, संचालक, जन औषधि केंद्र
- जिला संयुक्त अस्पताल में बने जन औषधि केंद्र में आंख की ड्रोप तक नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा मांसपेशियों में होने वाले दर्द निवारक की क्रीम भी नहीं मिल पा रही है। कंपनी को लिखवाया हुआ है, लेकिन आर्डर पूरा करने में समय लग रहा है।
- शमे रजा, संचालक, जन औषधि केंद्र
- यदि दवाइयों का टोटा है, तो जन औषधि केंद्र संचालकों से वार्ता की जाएगी और दवाइयों की पूर्ति कराई जाएगी। फिलहाल जिले में 14 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। नए खोलने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- रुचि बंसल, औषधि निरीक्षक