देश दुनिया में मशहूर गुजरात के गरबा का जिक्र हो और डांडिया की बात न हो, यह हो नहीं सकता। बिना डांडिया गरबा अधूरा है। लेकिन बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि ये डांडिया अमरोहा की होती है। अमरोहा में बनी डांडिया पर ही गुजराती गरबा में थिरकते हैं। गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र में भी अमरोहा की बनी डांडिया इस्तेमाल की जाती है। इस बार गुजरात में होने वाले डांडिया कार्यक्रमों के लिए पहले ही शहर को आर्डर मिल चुके हैं।
अमरोहा के ढोलक कारोबार के बारे में हर किसी को पता है। यहां बने ढोलक देश के बाहर भी भेजे जाते हैं। ढोलक के साथ डांडिया का भी कारोबार होता है। करीब 15 साल से शहर में डांडिया का काम होता है। ढोलक कारोबार से जुड़े कुछ कारोबारी डांडिया भी बनाते हैं। यहां बनी डांडिया की गुजरात में सबसे अधिक डिमांड है। हर साल गरबा से पहले अमरोहा की डांडिया गुजरात पहुंच जाती है। गरबा में गुजरातियों के हाथों में शहर की डांडिया खूब देखने को मिलती है। हर साल अमरोहा से डांडिया की सप्लाई गुजरात की जाती है। इसके अलावा महाराष्ट्र में भी अमरोहा की बनी डांडिया की डिमांड है।
‘गुजरातियों को भाती है डांडिया की खूबसूरती’:
लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष शक्ति कुमार अग्रवाल का कहना है कि अमरोहा की बनी डांडिया गुजरातियों को बहुत पसंद आती है। काम की फिनिशिंग अच्छी होती है। यहां के कारीगर इसमें डिजाइन भी बनाने में माहिर हैं। यहां की बनी डांडिया दूसरे जगहों से सस्ती होती है।
नए साल के साथ ही आने लगते हैं आर्डर:
नए साल का आगाज होने के साथ ही डांडिया के लिए गुजरात से आर्डर आने लगते हैं। डांडिया के आर्डर फरवरी तक आते हैं। जिसे अगस्त सितंबर तक गुजरात भेज दिया जाता है। आर्डर तैयार करने में एक महीन का वक्त लगता है। यूपी के शहरों में डांडिया की डिमांड न के बराबर है। यूपी में इसकी डिमांड छिटपुट है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में डांडिया आ जाती है। या फिर बड़े कार्यक्रमों में जरूरत पड़ने पर डांडिया के आर्डर मिलते हैं।