को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर वातावरण देने के लिए अब बाल वाटिका अभियान के तहत ‘सुनहरी शुरुआत, बाल वाटिका के साथ’ थीम पर मुहिम शुरू की जा रही है। बाल-वाटिका में बच्चे खेल-खेल में पढ़ाई का ककहरा सीखेंगे। बाल-वाटिका से बच्चों को जोड़ने के लिए 16 अप्रैल से आंगनबाड़ी केंद्रों पर रैली, नाटक समेत अन्य गतिविधियों के माध्यम से बच्चों और अभिभावकों को जागरूक कर किया जाएगा।
को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र यानी ऐसे केंद्र जो परिषदीय स्कूलों के परिसर में ही आयोजित होते हैं। इनमें बच्चों को कक्षा एक में पढ़ने के लिए तैयार करने के लिए बाल-वाटिका का आयोजन होता है। जहां बच्चे खेल-खेल में अक्षर ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसके तहत अब आंगनबाड़ी केंद्रों पर बाल वाटिका अभियान के तहत सुनहरी शुरुआत बाल वाटिका के तहत पहल शुरू की है। 16 से 29 अप्रैल तक बच्चों को बाल-वाटिका से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
इसमें रोजाना अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए बीएसए से लेकर प्रधानाध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तक को जिम्मेदारियां सौंपी गई है। अभियान के तहत 16 व 17 अप्रैल को प्रभातफेरी और रैली का आयोजन होगा। इसके अलावा 18 से 21 अप्रैल तक गांवों में सभा का आयोजन किया जाएगा। 22 व 23 अप्रैल को कहानी व नाटक के जरिए बच्चों को स्कूल भेजने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 24 व 25 अप्रैल को अभिभावकों की अलग-अलग प्रतियोगिताएं की जाएंगी। इसके बाद 28 व 29 अप्रैल को शिक्षक अभिभावक व एसएमसी की बैठक का आयोजन होगा।
यह है अभियान का उद्देश्य
- सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था में शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना।
- तीन से छह साल के बच्चों को बाल-वाटिका भेजने के लिए अभिभावकों को प्रेरित करना।
- पांच से छह साल के बच्चों को कक्षा-एक के लिए तैयार करना।
- सभी तीन से छह साल के बच्चों को बाल-वाटिका से जोड़ना।
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बाल वाटिका में बच्चों के जोड़ने के लिए अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए सभी जिम्मेदारी तय की गई है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अभियान के आयोजन के लिए निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। - डॉ. मोनिका, बीएसए