गजरौला सीएचसी में भर्ती जच्चा और नवजात को गोद में लिए तीमारदार।
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बाढ़ क्षेत्र में घिरी गर्भवती को प्रसव पीड़ा का दर्द सहते हुए गांव दारानगर से अस्पताल तक 12 किलोमीटर तक पहुंचने में चार घंटे लग गए। सबसे पहले महिला को गांव से भैंसा बुग्गी के सहारे गंगा के नाले तक लाया गया। यहां से नाव से गंगा का नाला पार कराने के बाद महिला को फिर बुग्गी के एंबुलेंस तक लाया गया। फिर एंबुलेंस से उसको गजरौला के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहां उसने बेटी को जन्म दिया तो परिवार वाले तक आड़ेर् आइं सारी मुश्किलों को भूलकर खुश हो गए।
खादर के गांव दारानगर निवासी अशोक की पत्नी सुमन को शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। गर्भवती दर्द से करहाने लगी तो परिजनों ने एंबुलेंस को फोन किया। गांव और आसपास क्षेत्र में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण एंबुलेंस चार किलोमीटर पहले अलीनगर गांव में ही रुक गई। परिजन गांव से बुग्गी पर गर्भवती को गंगा के नाले तक लेकर पहुंचे। फिर यहां से नाव के सहारे महिला को पार कराया गया। इसके बाद फिर दूसरी भैंसा ब़ुग्गी से अलीनगर तक लाए और यहां खड़ी एंबुलेंस में महिला को बैठाकर गजरौला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया लाया गया। अस्पताल में महिला की जांच की गई तो प्रसव में थोड़ा समय होने की वजह से शाम को डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया।
रविवार सुबह फिर पीड़ा होने पर एंबुलेंस को फोन किया गया और परिवार वाले उसी तरीके से बुग्गी, नाव और फिर बुग्गी से एंबुलेंस तक महिला को लेकर पहुंचे और फिर अस्पताल लाया गया। रविवार सुबह आठ बजे अस्पताल में सुमन ने बेटी को जन्म दिया। जिससे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।