अमरोहा। पंचायतों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए। मकसद था कि गांवों से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाकर बिक्री से पंचायत की आय बढ़ाई जाएगी। लेकिन, जिले में अधिकांश निस्तारण केंद्रों पर लटके ताले योजना का मुंह चिढ़ा रहे हैं।
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गांवों में सड़क किनारे व घरों से इकट्ठा होने वाले कचरे से निजात दिलाने के लिए सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत कूड़ा निस्तारण केंद्रों का निर्माण कराया गया था। जिले के 150 से ज्यादा गांवों में यह केंद्र बनाए गए थे। जिससे घरों का कचरा इकट्ठा कर उसका डिस्पोजल कर दिया जाए। साथ ही इसका खाद बनाकर बेचने से पंचायतों की आय भी बढ़ाई जाए। लेकिन जिले में अधिकांश निस्तारण केंद्र निष्क्रिय होने से इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अलग-अलग इकट्ठा होना है गीला व सूखा कूड़ा
पंचायतों में जहां-जहां कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए हैं, वहां सूखा व गीले कचरे को अलग-अलग इकट्ठा किया जाना था। जिससे प्रोसेस के बाद जैविक खाद बनाते हुए उसकी बिक्री कर पंचायत की आय को बढ़ाया जाना था। इसके लिए घरों से कूड़ा एकत्र करने का चार्ज वसूले जाने की व्यवस्था भी की गई थी।
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केंद्र पर लटका ताला
आदमपुर। गांव भावली व रूपानांगल में बने कूड़ा निस्तारण केंद्र पर ताला लटका होने से इसका लाभ गांव वालों को नहीं मिल पा रहा है। गांव से न तो कूड़ा कलेक्शन किया जाता है और न ही निस्तारण केंद्र पर खाद बनाने की प्रक्रिया ही अपनाई जा रही है।
आज तक नहीं हुआ संचालन डिडौली। क्षेत्र के श्यौनाली व चौधरपुर आदि में कूड़ा निस्तारण केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी इनका संचालन ठीक से नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने इन निस्तारण केंद्रों का संचालन शुरू करने की मांग की है।
एफएसटीपी प्लांट से दूर होगी किल्लत
अमरोहा। मंडी धनौरा के चुचैला कलां में फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण चल रहा है। जिस पर करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण को शुरू हुए लगभग ढाई माह बीत गए हैं। प्लांट का निर्माण 90 दिनों में पूरा किया जाना था। लेकिन, निर्माण की गति धीमी होने के कारण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। डीपीआरओ के मुताबिक धीमे निर्माण को देखते हुए कार्यदायी संस्था को नोटिस जारी करते हुए निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्लांट के जरिये शौचालय टैंक के गाद से जैविक खाद बनाई जाएगी। अभी तक सेप्टिक टैंक के गाद को टैंकों में भरकर खुले में सड़क के किनारे गिरा दिया जाता है, जिससे जहां बड़े पैमाने पर पर्यावरण प्रदूषित होता है और भयंकर बीमारियां फैलती हैं।
- कूड़ा निस्तारण केंद्रों को सक्रिय करने के लिए पंचायतों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। निस्तारण केंद्राें की निष्क्रियता पर संबंधित पंचायतों को नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी की गई थी। केंद्रों को सक्रिय करवाया जाएगा।- पारुल सिसोदिया, डीपीआरओ