हसनपुर। उफान पर बह रही गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ ही तटीय इलाकों में कटान थमने का नाम शुरू हो गया है। सबसे नाजुक स्थिति सतेड़ा गांव के पास बनी हुई है। जहां गंगा नदी का तेज बहाव श्मशान घाट हॉल की दीवार को छू गया है। इससे पूरे ढांचे के जमींदोज होने का खतरा पैदा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब 16 वर्ष पूर्व करीब 14 लाख रुपये के बजट से निर्मित यह श्मशान घाट अब गंगा कटान की जद में है। कटान की तीव्रता को देखते हुए ग्रामीणों ने लोहे के टिनशेड को पहले ही उखाड़कर सुरक्षित कर लिया था, जबकि पक्का चबूतरा पूर्व में ही नदी में समा चुका है। इससे पूर्व कबीरपुर व धौरिया का श्मशान घाट भी गंगा के आगोश में समा चुका है।
क्षेत्र में करीब 45 किलोमीटर के दायरे में बहने वाली गंगा का पानी कई स्थानों पर अब सीधे तटबंधों से टकरा रहा है। खेतों में पानी भरने से गन्ना, धान, मक्का व सब्जियों की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, सिरसा गुर्जर व सतैड़ा की मड़ैया में कई छप्परनुमा आशियाने भी कटान की भेंट चढ़ गए हैं।
एसडीएम हिमांशु उपाध्याय ने बताया कि कटान प्रभावित क्षेत्रों पर प्रशासनिक टीम निरंतर निगरानी बनाए हुए है। तटीय आबादी को सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।