गजरौला (अमरोहा)। पहाड़ों में हो रही बारिश और हरिद्वार तथा बिजनौर बैराज से लाखों क्यूसेक पानी रोजाना छोड़े जाने के कारण गंगा उफनाई हुई है। बाढ़ का पानी गंगा पार के दर्जनों गांवों में भरा हुआ है। वहां रहने वाले लोगों की जान पर बनी हुई है। उनके लिए एक-एक मिनट वहां गुजारना काफी मुश्किल हो रहा है। इसके बावजूद कोई उनकी परेशानी को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
बुधवार को भी बाढ़ का पानी गांव जाटोवाली, शीशोवाली, टीकोवाली, ढाकोवाली समेत कई गांवों में घुसा रहा। मंगलवार की रात को बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ गया। इस कारण इन गांवों में बाढ़ की आशंका भी हो चली है। वहीं चकनवाला में रामगंगा पोषक नहर भी काफी उफान पर है। बुधवार को बाढ़ का पानी नहर से गांव शीशोवाली को जाने वाली डामर की सड़क पर काफी आगे तक जा पहुंचा। पहले ग्रामीणों ने नहर में टापू पर बने स्थान पर झोपड़ी डाल रखी थी। वहीं पर नाव से पार जाने वाले ग्रामीण आकर ठहरते थे। वह स्थान भी बाढ़ के पानी की भेंट चढ़ चुका है। आलम यह है कि बाढ़ का पानी आबादी के निकट गांव तक तेजी से बढ़ रहा है। गांव जाटोवाली निवासी देंवेंद्र कुमार ने बताया कि मंगलवार की रात गांव के अधिकांश लोगों ने जागकर काटी। उधर, खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण ग्रामीण अकेले वहां जाने से घबरा रहे हैं। फसलें भी लगभग नष्ट हो चुकी हैं।
हरिद्वार और बिजनौर से छोड़ा डेढ़ लाख क्यूसेक पानी
गजरौला। बाढ़ खंड के जेई प्रदीप कुमार ने बताया कि बुधवार को तिगरी में गंगा का जल स्तर 30 सेंटीमीटर बढ़कर 199.90 गेज मीटर रिकार्ड किया गया। उन्होंने बताया कि हरिद्वार बैराज से 76 हजार 102 एवं बिजनौर बैराज से 86 हजार 147 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं तिगरी में गंगा तेजी से कटान करने में लगी हुई है। इससे वहां के ग्रामीणों के साथ ही आसपास के गांवों के लोग भी दहशत में हैं। गंगा का रौद्ररूप देखकर सभी बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं।