फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: उफनाई गंगा... गांवाें तक पहुंचा पानी, फसलें जलमग्न

विज्ञापन
गंगा में  जल  स्तर  बढ़ने  पर  जद्दोजहद कर चारा लाते गजरौला के शीशों वाली गांव के ग्रामीण। स्रो - फोटो : ग्रामीण
विज्ञापन
अमरोहा।
विज्ञापन

पहाड़ों से लेकर निचले इलाकों में लगातार बारिश के चलते गंगा नदी उफन पर है। मंडी धनौरा व हसनपुर तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। खेतों में गंगा का पानी भरा है। गंगा लगातार कटान कर रही है। हसनपुर के गंगानगर तो धनौरा के बिशावली, शाहजहांपुर, मुकरामपुर व शीशोंवाली गांव के करीब गंगा का पानी पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों में दहशत है।

किसानों की फसलें बर्बादी की कगार पर पहुंच गईं हैं। यही हालात रहे तो गंगा किनारे बसे गांव के लोगों को पलायन करना पड़ेगा। उधर, उत्तराखंड के धराली में बादल फटने के बाद हालात और भी बिगड़ सकते हैं।
विज्ञापन


बारिश शुरू होते ही गंगा में जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण चिंतित है। लगातार कालागढ़ डैम व हरिद्वार से पानी छोड़ा जा रहा है। हर साल धनौरा, हसनपुर व गजरौला के खादर क्षेत्र में बसे दर्जनों गांव बाढ़ की जद में आते हैं। इसको लेकर प्रशासन की ओर से बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। चौकियों से लेकर अन्य इंतजाम की बात कही जाती है लेकिन हर साल बाढ़ तबाही मचाती है।

कहने को तो इस बार भी खादर क्षेत्र में बाढ़ चौकियां बना दी गईं हैं लेकिन पुख्ता इंतजाम न होना ग्रामीणों पर भारी पड़ सकता है। गंगा में आने वाली बाढ़ हर साल हसनपुर व धनौरा क्षेत्र के 20 से ज्यादा गांवों में तबाही मचाती है। फसल बर्बाद हो जाने के साथ ग्रामीणों का जीवन खतरे में पड़ जाता है। दारानगर, शीशों वाली, टीकों वाली, भुड्डी वाली गांव गंगा के टापू में बसे हैं जबकि चकनवाला, मुरादपुर, अलीनगर, घासीपुरा, सीकरी खादर, ओसीता जगदेवपुर, कबीरपुर, मोहम्मदाबाद गंगा तट बांध की दूसरी तरफ हैं। गंगा किनारे और टापू में बसे गांवों में बाढ़ पानी भर जाता है।

मंगलवार को इन गांवों में यही हालात देखने को मिले। गंगा कटान कर गांवों की तरफ बढ़ रही है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में इन दिनों ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं। बाढ़ के पानी से खेतों में जलमग्न फसलें गलने लगीं हैं। वहीं ग्रामीणों के कच्चे मकान धराशाही होने का डर सता रहा है। गंगा के उस पार से पशुओं के लिए हरा चारा व भूसा लाने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। तिगरी में झोपड़ी जलमग्न होने से पुरोहितों को भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।



खतरे के निशान से सिर्फ 1.70 मीटर दूर गंगा

गजरौला। मंगलवार को बिजनौर बैराज से गंगा में 174339 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तिगरी में गंगा का जलस्तर 200.30 मीटर पर दर्ज किया गया। तीन दिन से जल स्तर स्थिर चल रहा है लेकिन बाढ़ का पानी निचले इलाके के खेतों में भर गया है। टापू में बसे दारानगर, शीशों वाली, ढाकों वाली समेत अन्य गांवों के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। शीशों वाली गांव के ग्रामीण उफान पर चल रहे बाह नाला तैरकर या नाव से चारा लाने को मजबूर हैं। ओसीता जगदेवपुर के खेतों को जाने वाले रास्ते में भी बाढ़ का चार से पांच फीट पानी भर गया है। बाढ़ खंड विभाग के जेई सुभाष चंद गहलौत का कहना है कि जल स्तर बढ़ गया है, लेकिन खतरे के निशान 202 मीटर से जल स्तर सिर्फ 1.70 मीटर दूर है।



खेतों में घुसा बाढ़ का पानी, दहशत में ग्रामीण

मंडी धनौरा। लगातार हो रही बारिश से किसानों को चिंता होने लगी है। रसूलपुर भांवर, शाहजहांपुर छात, मुकारमपुर, विशावली, शीशोवाली आदि में बाढ़ का पानी खेतों मेंं घुस गया है। ग्रामीणों को अपनी फसल की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों को पशुओं को चारा लेने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। मंगलवार दोपहर बाद एडीएम गरिमा सिंह ने कई गांवों का निरीक्षण किया। एसडीएम विभा श्रीवास्तव ने बताया कि अभी किसी भी गांव में पानी आने की सूचना नहीं है। बाढ़ चौकियों को पूरी तरह अलर्ट पर रखा गया है।



हसनपुर के ग्रामीणों को खेत से चारा लाने में हो रही परेशानी

हसनपुर। धोरिया, दियावली खालसा, सतेडा, गंगाचोली, गंगानगर, सिरसा गुर्जर, वीरामपुर और जल्लोपुर जैसे गांवों में किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। धान, ज्वार, बाजरा और गन्ने की खड़ी फसलें पूरी तरह से पानी में डूब चुकी हैं। गांव दियावली निवासी किसान कमल सिंह ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो सकती है। खेतों के रास्तों पर भी बाढ़ का पानी भरा है। गंगाचोली निवासी किसान जितेंद्र सिंह ने बताया कि अगर जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने प्रशासन मदद की मांग की है और फसल के नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।
विज्ञापन


-
गंगा के जलस्तर की स्थिति पर नजर बनी हुई है। बाढ़ चौकी पर लेखपालों की ड्यूटी लगाई हुई है। गंगा किनारे की कुछ कृषि क्षेत्रफल में ही पानी भरा हो सकता है, लेकिन बाढ़ जैसे हालात नहीं है। - पुष्करनाथ चौधरी, एसडीएम हसनपुर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें