गजरौला। पहाड़ों में हो रही बारिश और बिजनौर बैराज से भारी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किए जाने की वजह से गंगा जबरदस्त उफान पर है। तिगरी और ब्रजघाट में गंगा खतरे के निशान से मात्र दो मीटर की दूरी पर जा पहुंची है। वहीं गंगा के लगातार बढ़ते जल स्तर से गंगा के किनारे और आसपास के गांवों के खेतों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीणों को बाढ़ की आशंका सताने लगी है। हालांकि बाढ़ खंड के जेई प्रदीप सागर ने बताया कि आने वाले दिनों में गंगा का जल स्तर और बढ़ने की संभावना है। लेकिन, बाढ़ की फिलहाल कोई आशंका नहीं है।
इन दिनों पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। पहाड़ों में कुछ स्थानों पर तो बादल भी फटने की चर्चाएं हैं। यही वजह है कि गंगा और उसकी सहायक नदियां जबरदस्त उफान पर हैं। इससे गंगा के आसपास के इलाके में मौजूद गांवों में बाढ़ पानी आने लगा है। बाढ़ खंड के जेई प्रदीप सागर ने बताया कि सुबह को तिगरी में गंगा का जल स्तर 20 सेंटीमीटर बढ़कर 200.00 गेज मीटर जा पहुंचा है। उन्होंने बताया कि सुबह के समय बिजनौर बैराज से एक लाख दस हजार 521 क्यूसेकर पानी डिस्चार्ज किया गया है। अगले एक-दो दिन में जल स्तर और 20-25 सेंटीमीटर बढ़ने की संभावना है। वहीं गंगा के तेजी से कटान करने के कारण दारानगर, टीकीवाली, शीशोवाली, मंदिर वाली भुड्डी, रम्पुरा, पछैल भुड्डी, जाटोवाली, विसावली, पीपलवाली, कुएंवाली आदि समेत 20 से अधिक गांवों के आसपास बाढ़ का पानी आ गया है। वहीं तिगरी में घाट के किनारे रखे दुकानदारों और पंडितों के तख्त आदि भी पानी में डूबे हुए हैं।
रात भर गंगा से आई सांय-सांय की आवाज, सहमे ग्रामीण
गजरौला। रामगंगा पोषक नहर (इन दिनों गंगा का पानी आने के कारण गंगा में तब्दील) के पार स्थित गांव दारानगर में गंगा तेजी से कटान कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक रात में गंगा से सांय-सांय की आवाजें गांव तक आती हैं। ऐसे में उनके भीतर सिहरन दौड़ जाती है। यही खतरा बना रहता है कि कहीं बाढ़ का पानी गांव की आबादी तक न आ जाए। वहीं राम गंगापोषक नहर के पार स्थित गांव शीशोवाली और टीकोवाली के ग्रामीण भी इन दिनों दहशत के साए में अपना जीवन गुजार रहे हैं।
कभी भी पलट सकती है नाव, प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
गजरौला। रामगंगा पोषक नहर में इन दिनों गंगा में आई बाढ़ का पानी बैक मारने के कारण उफान आया हुआ है। इसके बावजूद ग्रामीण यहां चलने वाली नाव में क्षमता से अधिक सामान रखकर सफर करने से बाज नहीं आ रहे हैं। तीन दिन पूर्व चकनवाला में एक नाव पलटने से बाल-बाल बची थी। फिर भी ग्रामीण एक नाव में छह बाइक और काफी संख्या में खड़े होकर सामान के साथ सफर कर रहे हैं। हालांकि इसमें जान को खतरा बना रहता है। लेकिन, ग्रामीण बाज नहीं आ रहे हैं। वहीं प्रशासन भी इस पर अंकुश लगाने के प्रति गंभीर नहीं है।