अमरोहा। सात साल पहले दूध के प्लांट में गैस रिसाव के कारण किसान की मौत हो गई। पीड़ित परिजनों ने बीमा कंपनी से मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अंतर्गत क्लेम मांगा तो देने से इन्कार कर दिया। अब उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को पांच लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक और मानसिक पीड़ा व वाद व्यय के रूप में 15 हजार रुपये भी देने होंगे।
हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के डगरोली कालका वाली में रहने वाले सुरेंद्र सिंह किसान थे। वह उझारी स्थित दूध के प्लांट में नौकरी भी करते थे। 12 फरवरी 2019 को दूध के प्लांट में गैस रिसाव होने से उनकी मौत हो गई थी। परिजनों ने सैदनगली थाने में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। क्योंकि सुरेंद्र सिंह किसान थे, इसलिए वह मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना की श्रेणी में भी आते थे। मामले में मृतक सुरेंद्र सिंह की पत्नी मिथलेश देवी ने क्लेम लेने के लिए आवेदन किया तो बीमा कंपनी ने उसे निरस्त कर दिया।
कंपनी ने दावा किया कि मृतक की विसरा रिपोर्ट में आरगेनोफास्फोरस इन्सेक्टीसाइड व इथाइल एल्कोहल विष पाया गया था। सुरेंद्र के शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं थे। बीमा कंपनी के द्वारा क्लेम नहीं देने पर मिथलेश देवी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम ने बीमा कंपनी को मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये की धनराशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आर्थिक मानसिक पीड़ा के लिए 10 हजार और वाद व्यय में के रूप में पांच हजार रुपये भी देने होंगे। उपभोक्ता फोरम ने यह धनराशि एक महीने के भीतर अदा करने के निर्देश दिए हैं।