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Amroha News: बाह नाला में पानी आने के चार दिन बाद भी नहीं लगाया गया पैंटून पुल

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गजरौला(अमरोहा)। बाह नाला में पानी छोड़ने के चार दिन बाद भी पैंटून पुल नहीं लगाने से छह गांवों के ग्रामीण परेशानी झेल रहे हैं। किसानों के सामने गन्ने लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालने की समस्या है। नाव में चढ़ाते समय हादसे का डर बना रहता है। पिछले साल एक ट्रैक्टर नाव से नहर में गिर गया था।
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क्षेत्र के गांव अलीनगर के सामने रामगंगा पोषक नहर प्रवाहित हो रही है। जिसे बाह नाला कहा जाता है। इसमें सात दिसंबर को पानी छोड़ गया। इसमें पानी छोड़ दिए जाने पर हर साल पैंटून पुल लगा दिया जाता है। जिससे दारानगर, पपसरा खादर, मुरादपुर, अलीनगर, टीकों वाली, भुड्डी वाली समेत छह गावों के ग्रामीणों को गन्ना लदे ट्रैक्टर ट्रॉली निकालने के लिए नाव पर निर्भर न रहना पड़े। मगर इस बार चार दिन बाद भी नहीं लगाया गया। जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चूंकि नाव करीब 30 क्विंटल वजन ही वहन कर पाती है। उससे अधिक वजन का वाहन लादने पर हिचकौले खाकर डूबने या पलट जाने की आशंका रहती है, जबकि चीनी मिलों की एक पर्ची के लिए 40 से 60 क्विंटल गन्ना ले जाया जाता है। मगर सिंचाई विभाग ने पैंटून पुल नहीं लगाया। इस कारण छह गांवों के किसान गन्ने लदे ट्रैक्टर ट्रॉली कैसे निकालें, ग्रामीणों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई है। विभाग के कर्मचारियों ने पुल के लिए अभी तक नट, बोल्ट का प्रबंध भी नहीं किया। कबाड़ा भी एकत्र नहीं किया गया। उसके बेहद उदासीन तरीके से किए जा रहे कार्य से ग्रामीण हैरत में हैं। सोनू सिंह भड़ाना, मास्टर योगेश भड़ाना, देवेंद्र, गोविंद सहाय, दीपक, भोले, जगपाल सिंह भड़ाना आदि किसानों का कहना है कि पैंटून पुल नहीं लगने के कारण उनके सामने दिक्कत आ रही है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता रवि प्रकाश सिंह ने बताया कि पैंटून पुल लगाने का काम एक दिन में शुरू हो जाएगा।





हादसे की आशंका के साथ ढीली हो रही जेब
गजरौला। उपरोक्त गांवों में दारानगर, टीकों वाली, भुड्डी वाली गांव गंगा और बाह नाला के टापू में बसे हैं। जिनका आना जाना नाव पर ही निर्भर है, जबकि पपसरा खादर, मुरादपुर, अलीनगर के ग्रामीणों की कृषि योग्य भूमि टापू में है। जिसमें गन्ने की फसल उगाई गई है। इस समय गन्ने की छिलाई कार्य चल रहा है। गन्ना लदा ट्रैक्टर ट्रॉली निकालने के लिए एक साथ दो नाव जोड़नी पड़ती हैं। एक चक्कर पार कराने के लिए किसान से नाविक 300 रुपये लेता है। इसके अलावा हादसे का डर बना रहता है। वहीं बाह नाला पर बने पक्के पुल से ट्रैक्टर ट्रॉली निकालने में दस किमी का चक्कर लगाना पड़ता है। साथ ही समय भी अधिक लगता है।
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