पहाड़ों और मैदानी इलाकों में कुछ दिन से बारिश हल्की होने से गंगा का जलस्तर स्थिर हो गया है। फिर भी गंगा से सटे ग्रामीण अंचलों के खेतों में कटान जारी है। खतरा अभी टला नहीं है। इसी के साथ अभी बारिश बाकी है। गंगा एक बार फिर उफान भर सकती है।
पिछले दिनों खेतों में भरे गंगा के पानी से फसलों की पैदावार आधी हो गई है। यदि गंगा ने फिर से उफान भरा तो किसान हाथ मलते रह जाएंगे। उधर प्रशासन जलस्तर पर तो नजर जमाए हुए है, लेकिन किसानों के नुकसान की सुध नहीं ली है।
बता दें कि ब्रजघाट गंगा का खतरे का निशान 199.34 मीटर और तिगरी का खतरे का निशान 202.20 मीटर है। 15 जून से पहाड़ों और मैदानी इलाकों में शुरू हुई बारिश से गंगा उफान भरने लगी। ब्रजघाट का जलस्तर अधिकतम 198.95 मीटर और तिगरी का जलस्तर 201.20 मीटर तक पहुंच गया था। जिससे गंगा ने तटों का कटान कर खेतों की ओर रुख कर लिया था।
तिगरी से लेकर ब्रजघाट तक करीब 10 किलोमीटर के परिक्षेत्र में स्थित खादर गांव के खेतों में लहरा रही फसलें गंगा के पानी में डूब गई थीं। पिछले एक सप्ताह से लगातार गंगा के जलस्तर में गिरावट आने लगी है। खेतों से पानी उतरना शुरू हो गया है। लेकिन खतरा अभी बरकरार है।
जिससे किसानों की धान, गन्ना, लोबिया, उड़द और शकरकंदी की फसलों की पैदावार पर खासा असर पड़ा है। ओसीदा जग्देपुर के खेतों में गंगा का पानी कम जरूर हुआ है। अभी तक तमाम खेत जलमग्न हैं। खेतों की मिट्टी दलदल का रुप ले चुकी है। अभी करीब एक माह की बारिश शेष है। यही हाल रहा तो बची खुची फसलें भी चौपट हो जाएंगी।