गजरौला। हसनपुर तहसील के फिरोजपुर निवासी पिंटू और रेशमा के बीच प्रेम संबंध परवान चढ़ा और अंतर जातीय होने के बावजूद दोनों ने शादी कर घर बसा लिया। उनके इस विवाह का परिजनों ने विरोध किया, लेकिन प्रेम के आगे उन्हें भी झुकना पड़ा। तीन साल बाद पिंटू के परिजनों ने दोनों को अपना लिया। हसनपुर तहसील के गांव फिरोजपुर निवासी पिंटू भाटी 2008 में मुजफ्फरनगर के कस्बा बघरा में मोबाइल कंपनी में नौकरी करते थे। रेशमा निजी स्कूल में पढ़ाती थीं। इस दौरान दोनों एक-दूसरे से नजदीक आए और दोनों एक-दूसरे से प्रेम करने लगे। दोनों ने अपने परिजनों से शादी की बात कही, लेकिन वे राजी नहीं हुए। वहीं रेशमा का अन्य लड़के से रिश्ता तय हो गया। इस बीच दोनों ने 28 अगस्त-2010 को परिजनों की मर्जी के खिलाफ जाकर प्रेम विवाह कर लिया, जिसके बाद पिंटू भाटी के परिजनों ने पिंटू व रेशमा को घर में नहीं घुसने दिया। इस बीच पिंटू भाटी के छोटे भाई रिंकू ने पिंटू व रेशमा से बात की। दोनों से घर आने को कहा। रिंकू के समझाने पर तीन साल बाद रेशमा व पिंटू को फिरोजपुर स्थित अपने घर में प्रवेश मिला।
दोस्तों के कहने पर पत्नी को राजनीति में उतारा
वर्ष 2017 में जिला पंचायत सदस्य के उपचुनाव में वार्ड-17 से भाजपा को जिताऊ प्रत्याशी की तलाश थी। मित्र मनोज गुर्जर व सुमित नागर के कहने पर वह पत्नी रेशमा को राजनीति में उतारने के लिए तैयार हुए। भाजपा ने रेशमा को जिला पंचायत सदस्य के लिए टिकट दिया। उनके सामने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश आर्य मैदान में उतरीं। युवा होने के कारण रेशमा का जादू मतदाताओं के सिर चढ़ कर बोला। उन्होंने भारी मतों से बसपा की कमलेश को पराजित किया। इसके बाद 2021 में रेशमा को पिंटू भाटी ने वार्ड-20 से मैदान में उतारा। दूसरी बार भी उन्होंने बसपा के प्रत्याशी बबलू डीलर को 58 सौ वोट से शिकस्त दी।