अमरोहा। अनुसूचित जाति के युवक की याचिका पर न्यायालय ने मंडी धनौरा के इंस्पेक्टर, दरोगा और चार सिपाहियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए है। पुलिस कर्मियों पर बेवजह मारपीट करना, जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित करना और हवालात में बंद रखने का आरोप है। पुलिस ने कार्रवाई करने पर झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। साथ ही 35 हजार रुपये ठग लिए। पुलिस ने न्यायालय के अनुपालन में आख्या प्रेषित नहीं की। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस कर्मियों में हड़कंप मचा है। थानेदार की कुर्सी पर रहकर मंडी धनौरा इंस्पेक्टर को खुद अपने खिलाफ रिपोर्ट लिखनी पड़ेगी।
मामला मंडी धनौरा थाने का है। क्षेत्र के गांव खेड़ा वाली मढै़या निवासी किशोर अनुज कुमार के पिता और दो भाइयों पर छेड़छाड़ का मुकदमा लिखा हुआ था। मुकदमे के संबंध में 12 मार्च को अनुज कुमार परिजन और जिम्मेदार ग्रामीणों के साथ ट्रैक्टर-ट्राली में सवार होकर एसपी दफ्तर जा रहा था। आरोप है कि जब उनका ट्रैक्टर थाने के सामने आया तो इंस्पेक्टर सरवेंद्र शर्मा, दरोगा रामनिवास शर्मा, सिपाही दुष्यंत राठी, सत्यपाल सिंह, अजब पाठक, कपिल देव अन्य पुलिस कर्मियों ने उसे रोक लिया और मारपीट की। जातिसूचक शब्द कहकर अपमानित किया। बाद में पुलिस ने किशोर और उसके परिजनों को हवालात में बंद कर दिया। पुलिस की पिटाई से किशोर के कान में गंभीर चोट आई। अनुज कुमार का आरोप है कि उसने कार्रवाई करने चाही तो आरोपी पुलिस कर्मियों ने जेल में डालने की धमकी दी और 35 हजार रुपये ठग लिए। पीड़ित ने एसपी दफ्तर में शिकायती पत्र दिया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद किशोर ने पांच जुलाई को न्यायालय की शरण लेकर सीआरपीसी की धारा 156 के तहत याचिका दायर की। इस याचिका पर अपर सत्र न्यायाधीश/एससी-एसटी एक्ट सुरेश चंद्र प्रथम ने सुनवाई की। न्यायालय ने तीन बार पुलिस को नोटिस जारी किया। लेकिन इंस्पेक्टर ने न्यायालय के अनुपालन में आख्या प्रेषित नहीं की। लिहाजा पुलिस कर्मियों को आरोपी मानते हुए न्यायालय ने 28 जुलाई को मंडी धनौरा थाना इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिए हैं। साथ ही विवेचना के बाद पुलिस रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अदालत के इस आदेश पर मंडी धनौरा इंस्पेक्टर खुद अपने और साथी पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करेंगे। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस कर्मियों में हड़कंप मचा है।
सात दिन बाद भी दर्ज नहीं रिपोर्ट
अमरोहा। खुद की गर्दन फंसी तो पुलिस हड़बड़ा गई है। पहले तो पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की। अब न्यायालय के आदेश पिछले सात दिन से ठंडे बस्ते में डाल कर रखे हुए है। आदेश हुए सात दिन बीत गए, लेकिन थानाध्यक्ष ने एफआईआर दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई है। वहीं, जिले के कप्तान मामला संज्ञान में होने से इंकार कर रहे हैं।
थानाध्यक्ष ने न्यायालय में पेश नहीं की आख्या
अमरोहा। पीड़ित युवक अनुज कुमार के याचिका में पुलिस पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए न्यायालय ने तीन बार पर इंस्पेक्टर से आख्या मांगी। लेकिन उन्होंने 20, 24 और 27 जुलाई तीन तारीखों पर जवाब देना उचित नहीं समझा। शायद इंस्पेक्टर यह भूल गए कि कानून सबके लिए बराबर होता है। अब न्यायालय ने खुद के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए तो हड़कंप मच गया।
- गांव में एक परिवार ने मेरे पिता भजन सिंह और दो भाई गुड्डू और निपेंद्र के खिलाफ छेड़छाड़ और मारपीट का झूठा मुकदमा लिखवा दिया था। इस झूठे मुकदमे की शिकायत करने के लिए सैकड़ों ग्रामीण एसपी दफ्तर जा रहे थे। तभी पुलिस कर्मियों ने रोक लिया। जातिसूचक शब्द कहे। मारपीट की और हवालात में डाल दिया। 35 हजार रुपये ठग लिए। इसके सात घंटे बाद शांतिभंग में चालान कर दिया। हमारी तरफ से भी एफआईआर दर्ज थी। लेकिन पुलिस ने दूसरे पक्ष पर कार्रवाई नहीं की।
- अनुज कुमार, पीड़ित याचिकाकर्ता
मामला मेरी जानकारी में नहीं है। अभी कोई ऐसा आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो पूरे प्रकरण की जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ विपिन ताडा, एसपी अमरोहा