जिले के सरकारी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की संख्या तेजी के साथ बढ़ी है। दवाई देने के साथ-साथ डाक्टर ड्रिप भी लगा रहे हैं। तकरीबन 200 लोगों की मलेरिया व टायफाइड जांच को स्लाइड बनाई जा रही हैं, जिसमें कुछ को मलेरिया, टायफाइड तो कुछ को सामान्य बुखार की पुष्टि हो रही है। अस्पतालों के वार्ड एकदम फुल चल रहे हैं। उधर प्राइवेट चिकित्सकों के यहां भी बुखार पीड़ितों का जमावड़ा है।
वायरल का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। चाहें अमरोहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हो या फिर जिला अस्पताल। हरेक के वार्ड में बेड मरीजों से फुल हैं। उल्टी तो किसी को सिर में तेज दर्द की शिकायत है, जिस पर डाक्टर मलेरिया व टायफाइड की जांच पर्चे पर लिखकर मरीजों के हाथों में थमा रहे हैं। चूंकि सरकारी अस्पतालों में ये जांच फ्री होती हैं। इसलिए मरीजों की संख्या उनमें सबसे अधिक दिखती है।
जिला अस्पताल में शुक्रवार को 1300 मरीजों ने पर्चे बनवाए, वहीं सीएचसी पर 800। इनमें से 200 मरीजों को मलेरिया व टायफाइड का शिकार मानते हुए चिकित्सकों ने जांच कराई तो 30 पीड़ित पाए गए। मामले की नजाकत को भांपते हुए डाक्टरों ने मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया है। दोनों अस्पताल के बेड मरीजों से भरे हैं।
इधर निजी नर्सिंग होम व क्लीनिकों पर भी वायरल फीवर से पीड़ित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। शायद ही कोई ऐसा अस्पताल व क्लीनिक हो, जहां पर भीड़ नजर न आए। प्राइवेट डाक्टर मलेरिया, डायफाइड के अलावा प्लेट्स की जांच करा रहे हैं, जिससे पैथलैब संचालकों की चांदी कट रही है।
वायरल फीवर के ये हैं लक्षण
सिर में तेज दर्द, उल्टी, बदन में दर्द, बुखार, टांगों में हड़कन, जुकाम आदि होना।
बचाव के तरीके
घर के आस पास सफाई रखें। मच्छरों से बचाव का प्रयास करें। वासी खाना बिल्कुल न खाएं। कटे फलों का सेवन न करें। अधिक से अधिक पानी पीयें। दर्द से निजात को कोई दर्द निवारक गोली न खाएं। बुखार होते ही झोलाछाप की बजाय सरकारी अस्पतालों में आकर दवाएं लें।