ट्रेन में प्रसव पीड़ा के दर्द से कराहती महिला को एसीएमओ ने ट्रेन से नीचे उतारकर प्लेटफार्म पर बने स्लैब पर लिटाया और कपड़े का घेरा बनवाकर डिलीवरी कराई। स्टेशन पर नवजात की किलकारी गूंज उठी।
ब्लेड का इंतजाम जीआरपी ने किया, जबकि आरपीएफ ने पब्लिक को मौके की ओर फटकने नहीं दिया। डिलीवरी सकुशल होने पर महिला को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां अब दोनों स्वस्थ हैं। परिवार के लोगों को भी सूचना दे दी गई है। बहरहाल डाक्टर के इस कार्य की सबने तारीफ की है।
जनपद बदायूं के गांव अतरिया निवासी महेश दिल्ली में एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम करता है। पत्नी पुष्पा, दो बच्चे विशाल व प्रवीन उसके साथ रहते हैं। बताते हैं कि गुरुवार को पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई, जिस पर उसने चिकित्सक को दिखाया। दो दिन लगने पर पत्नी ने घर पर जाने की इच्छा जाहिर की। इस पर उसने शुक्रवार की सुबह पत्नी को ऊना हिमाचल एक्सप्रेस से दोनों बेटों व पत्नी को बैठा लिया।
हापुड़ से ट्रेन जैसे ही चली वैसे ही महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। जैसे तैसे उसने अपने आप को संभाला, लेकिन गजरौला स्टेशन से ट्रेन के आगे बढ़ते ही दर्द से वह चीखने चिल्लाने लगी। गार्ड को मामले की जानकारी दी गई।
अमरोहा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रुकते ही आरपीएफ, जीआरपी के जवानों ने पूरा कोच खाली करा दिया, लेकिन दर्द से चीख रही महिला के पास जाने की कोई हिम्मत नहीं जुटा सका। इसी ट्रेन से उतरकर ड्यूटी के लिए जा रहे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय कुमार सक्सेना ने नजारा देखा तो उन्होंने हिम्मत बंधाई।
आरपीएफ व जीआरपी कर्मियों के सहयोग से महिला को कोच से नीचे उतारकर पेड़ की छांव में स्लैब पर लिटाया। वहां मौजूद एक महिला से पेड़ के सहारे कपड़ा का घेरा बनवाया। इसके बाद डिलीवरी कराई। मां-बेटी दोनों स्वस्थ थे। तत्पश्चात उन्होंने महिला व नवजात को एंबुलेंस से मुन्नीदेवी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिजवा दिया। डाक्टर के कार्य को सबने सराहा। कहा कि अगर वह चाहते तो अंजानों की तरह निकल जाते, मगर तड़पते मरीज को देख अपना कर्तव्य निभाया।