अमरोहा। ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में फंसाए गए पिता-भाई और रिश्तेदार को न्यायालय ने दोष मुक्त कर दिया है। कई महीने तक चले कानूनी प्रक्रिया के बाद 31 मार्च को तीनों बेदाग हो गए हैं। इससे पहले आरोपी पिता-पुत्र जमानत पर छूट चुके थे। जबकि उनका रिश्तेदार जेल में बंद था। दोष मुक्त का परवाना जेल पहुंचने के बाद एक मार्च को उसे भी रिहा कर दिया गया है। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता और आदमपुर इंस्पेक्टर ने दोषमुक्त होने की पुष्टि की है। इतना ही नहीं न्यायालय ने संबंधित विवेचक की कार्यशैली पर सख्त टिप्पणी करते हुए घोर लापरवाही करार दिया है। साथ ही डीजीपी, एडीजी और एसपी को पत्र लिखकर विभागीय कार्रवाई संबंधित रिपोर्ट तलब की गई है।
यह पूरा मामला आदमपुर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। छह फरवरी 2019 को किसान की 15 वर्षीय बेटी खेत से अचानक गायब हो गई थी। 10 फरवरी को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बावजूद इसके किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। बाद में मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा को दी गई थी।
उन्होंने जेल भेजे गए दोनों नामजद आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करा दिया था। लेकिन, बाद में पुलिस ने बड़ा कारनामा कर डाला था। 28 दिसंबर 2019 को किशोरी के किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग में जेल भेज दिया था। पुलिस ने कहानी बनाई कि परिवार ने बेटी के गलत संगत में पड़ने और गांव में बेइज्जती के डर से उसकी गोली मारकर हत्या कर दी है। साथ ही उसका शव गंगा में बहा दिया है। पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट में बेटी को दो गोली मारना दर्शाया गया था। जबकि किशोरी के कपड़े जंगल में झाड़ी से और तमंचा घर में संदूक से बरामद दिखाया गया था। पुलिस ने शव बरामद किए बिना ही पिता-भाई और एक रिश्तेदार को मुजरिम बना दिया था। लेकिन 7 अगस्त 2020 को किशोरी के जीवित मिलने से षड्यंत्रकारी पुलिस की झूठी स्क्रिप्ट से पर्दा उठ गया था।
किशोरी अपने गांव से कुछ किलोमीटर दूर प्रेमी के घर में बरामद हो गई थी। उसके पास एक बेटा था और वह गर्भवती थी। इस मामले में कई दिनों तक जिला न्यायालय में सुनवाई चली थी। पीड़ित परिवार के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि पूरे मामले में न्यायालय ने मुकदमे के विवेचक व तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा की घोर लापरवाही पाई है। झूठे मुकदमे में किशोरी के पिता और उसके भाई ने करीब 12-12 महीने जेल काटी है। जबकि रिश्तेदार 15 महीने पांच दिन में छूटा है।
अधिवक्ता के मुताबिक जिला न्यायालय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि विवेचक की घोर लापरवाही के चलते तीन निर्दोष लोग एक-एक साल तक जेल में रहे हैं। साथ ही न्यायालय ने डीजीपी, एडीजी और एसपी पत्र लिखकर विभागीय कार्रवाई संबंधित रिपोर्ट की तलब की है। वहीं, आदमपुर इंस्पेक्टर ने बताया कि ऑनर किलिंग के मामले में पिता-भाई और रिश्तेदार को न्यायालय ने 31 मार्च को दोष मुक्त कर दिया है।