अमरोहा कलक्ट्रेट में मुआवजे की मांग को प्रदर्शन दरियापुर बुजुर्ग के ग्रामीण।
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अमरोहा। एनएचएई की कार्यशैली के खिलाफ छह गांव के लोगों ने आवाज बुलंद की है। इसके चलते अधिग्रहित गांव के जमीन के मामले ने तूल पकड़ लिया है। उन्होंने कहा कि सात महीने के बाद भी जमीन की कीमत तय नहीं हो सकी है। इसके चलते किसानों ने अधिग्रहित भूमि को दान करने का एलान किया है। साथ ही परिवार के साथ आत्महत्या की चेतावनी दी है। डीएम उमेश मिश्र ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया।
जिले के जलालपुर और झनकपुरी, दरियापुर बुजुर्ग, भानपुर खालसा, सलारपुर गांव के लोग गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर में आए। उन्होंने कहा कि जुलाई में आश्वासन के बाद धरना समाप्त किया था। उस समय जिला प्रशासन ने कहा कि अधिग्रहित भूमि के 500 वर्गमीटर तक के हिस्से का मुआवजा वर्ष 2016-17 की सर्किल रेट के अनुसार किया जाए, लेकिन सात महीने बीत गए हैं अब तक इस मसले पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। किसानों ने कहा कि एनएचएई के एक अधिकारी ने किसानों से कई बार दुर्व्यवहार किया है। इससे किसान आहत हैं। किसानों ने 10 रुपये के स्टांप पर जमीन दान देने का ऐलान किया है। किसानों का कहना है कि मजबूरी में दान कर रहे हैं। जमीन तो दान कर रहे हैं इसके बाद परिवार के साथ आत्महत्या कर लेंगे। शपथ पत्र पर भगवानदास, महेंद्र सिंह, नरोत्तम सिंह, रामस्वरूप, मदनपाल, शीशराम सिंह, राजबाला, फिरोजा, हनीफ, हुकूम सिंह, जितेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह आदि के हस्ताक्षर हैं।
मुरादाबाद में ऑर्बिट्रेटर के समक्ष मामला लंबित है। इस मामले में कोर्ट को निर्णय तय करना है। जो निर्णय आएगा उसका पालन करेंगे। - उमेश मिश्र, डीएम