बाढ़ से खराब हुई फसलों का सर्वे करती टीम। स्रोत- विभाग
- फोटो : mathura
अमरोहा। लगातार बारिश और बाढ़ ने अन्नदाता के सिर पर मुसीबतों का पहाड़ गिरा दिया है। बिजनौर बैराज से लगातार छोड़े जाने की वजह से गंगा किनारे के गांवों में रहने वाले किसानों की करीब 70 फीसदी फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ से होने वाले नुकसान का आंकड़ा जानने के फसलों के सर्वे का काम भी शुरू हो गया है। उसमें भी 70 फीसदी खराब होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सर्वे के बाद कृषि विभाग बीमा कंपनी से किसानों को क्षतिपूर्ति दिलाने की कार्रवाई करेगा।
मंडी धनौरा, गजरौला और हसनपुर क्षेत्र में गंगा किनारे बसे गांवों में पिछले एक माह से भी अधिक समय से बाढ़ की दुश्वारियां परेशान कर रही हैं। लगातार जलस्तर के बने रहने से सामान्य जनजीवन भी अस्तव्यस्त हो गया है। मेहनत की गाढ़ी कमाई से तैयार की गई फसलें भी बर्बाद हो चुकी हैं। धान व दलहन आदि फसलों में लगातार पानी भरा होने के कारण फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। तीनों क्षेत्रों के लगभग 40 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
प्रशासन की और से इन गांवों में स्वास्थ्य कैंप समेत जरूरी सुविधाएं व राशन आदि की व्यवस्था कराई जा रही है। लेकिन इसके बाद भी लोगों की परेशानियां कम नही हैं। जहां-जहां पानी कम हो रहा है, वहां बीमारियाें का खतरा भी सताने लगा है। बाढ़ से फसलों के नुकसान का आकलन कराने के लिए सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है।
कृषि विभाग की मानें तो 51 गांवों में सर्वे का काम शुरू हो गया है। जलस्तर बरकरार रहने से सर्वे का काम ठीक से नहीं हो पा रहा है। हालांकि जहां जलस्तर में कुछ कमी हुई है, वहां सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है।