अमरोहा। भले ही अमरोहा में कांग्रेस को भाजपा के हाथों शिकस्त मिली हो, लेकिन 40 बरस के लंबे अरसे के बाद यहां कांग्रेस ने अपना खोया राजनीतिक वजूद हासिल कर लिया। 1989 के बाद कांग्रेस इस चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है।
40 सालाें से कांग्रेस अमरोहा में वोटों का सूखा झेल रही थी। 1984 में रामपाल सिंह इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर संसद पहुंचे थे। जिसके बाद इस सीट पर कांग्रेस जीत का वरण नहीं कर सकी है। 1989 के चुनाव में भी कांग्रेस यहां दूसरे स्थान पर रही। लेकिन इसके बाद अमरोहा में कांग्रेस का जनाधार सिमटता चला गया। इतने सालों के बाद यह पहला मौका था, जब कांग्रेस इस सीट पर मजबूत और दमदार तरीके से लड़ी। इससे पहले के चुनावों में चुनाव दर चुनाव कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिरता चला गया था। कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर दानिश अली ने चुनाव से ऐन पहले पार्टी में एंट्री ली थी। सपा के गठबंधन के सहारे कांग्रेस को इस सीट पर अपना खोया जनाधार वापस हासिल करने में कामयाबी मिली है। कांग्रेस ने इस सीट के इतिहास में अपना सर्वाधिक वोट फीसदी हासिल किया है। कांग्रेस को यहां 40.39 फीसदी वोट हासिल हुए।
कांग्रेस को मिला गठबंधन का फायदा
अमरोहा में कांग्रेस को गठबंधन का फायदा लगा है। पिछले चुनावों में वोटों के लिए तरस रही कांग्रेस को सपा ने संजीवनी दे दी। इसका परिणाम यह रहा कि कांग्रेस के कैडर वोटों के साथ-साथ उसको सपा के परंपरागत वोट भी जमकर पड़े। यही कारण रहा कि कांग्रेस ने भाजपा को यहां मजबूत टक्कर दी है।
1984 के बाद लोस चुनावों में कांग्रेस की स्थिति
चुनावी साल - प्रत्याशी - मिले वोट
1984 - रामपाल सिंह - 181642
1889 - खुर्शीद अहमद - 123477
1991 - दिलदार हुसैन - 74682
1996 - कांशीराम - 41383
1998 - शिवस्वरूप टंडन - 35481
2004 - विक्रम सिंह - 7949
2009 - नफीस अंसारी - 16878
2019 - सचिन चौधरी - 12510
2024 - कुंवर दानिश अली - 447836
(नोट: 1999 एवं 2014 में गठबंधन के तहत कांग्रेस के प्रत्याशी नहीं थे।)