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गजरौला में तीन दिन रुके थे पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा

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गजरौला (अमरोहा)। चिपको आंदोलन के प्रणेता, पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा गजरौला में भी तीन दिन रुके थे। वह यहां अपने मित्र पूर्व मंत्री दिवंगत रमाशंकर कौशिक के निधन के बाद उनके भाई डा. रविशंकर शर्मा से मिलने आए थे। यहां आकर उन्होंने उनके पुत्र राहुल कौशिक एवं पोती मौली कौशिक के सिर पर हाथ रखकर अपना आशीर्वाद भी दिया और कहा कि वह सदैव उनके साथ हैं।
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शुक्रवार को सुंदरलाल बहुगुणा के ऋषिकेश में अंतिम सांस लेने की खबर मिलते ही यहां बस्ती में स्थित पूर्व मंत्री दिवंगत रमाशंकर कौशिक के आवास अवंतिका में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व मंत्री के पुत्र राहुल कौशिक ने कहा कि पिता और ताऊ जी के निधन के बाद उनके सिर से मानो छत्रछाया चली गई। राहुल कौशिक ने भावुक होते हुए बताया कि सुंदरलाल बहुगुणा से उनके पारिवारिक संबंध रहे हैं। पिता रमाशंकर कौशिक को वह छोटे भाई के समान स्नेह करते थे। वह मई 2009 में उनके आवास पर गजरौला आए थे। राहुल कौशिक ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे जी ने पूर्व में एक कुष्ठ आश्रम संचालित किया था। इसमें उनके ताऊ डा. रविशंकर शर्मा चिकित्सक थे। ये सभी लोग सर्वोदयी और गांधीवादी थे। बाबू जी के निधन पर शोक व्यक्त करने और ताऊ जी से मिलने के लिए ही सुंदरलाल बहुगुणा अपनी पत्नी विमला बहुगुणा के साथ यहां आए थे। वह यहां तीन दिन रुके। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, छुआछूत निवारण, चिपको आंदोलन, टिहरी बांध आदि के संबंध में चर्चा की। प्रकृति के बिगड़ते संतुलन के लिए पेड़ों के अंधाधुंध कटान और बड़े बांधों के निर्माण को जिम्मेदार ठहराया था। राहुल कौशिक एवं उनके पारिवारिक सदस्य विपिन कौशिक ने सुंदरलाल बहुगुणा के निधन को अपने परिवार की बड़ी क्षति बताया।
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