अमरोहा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर संचालित प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के तहत प्रभावी विरोध सभा आयोजित की गईं। अभियान में बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों के हो रहे उत्पीड़न, बिजली क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निजीकरण तथा तानाशाहीपूर्ण नीतियों का विरोध किया गया।
मंगलवार को कलक्ट्रेट बिजलीघर परिसर में आयोजित संघर्ष समिति की ओर से जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे। वक्ताओं ने कहा कि ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से लगातार मिल रही शिकायतों और उल्लंघनों का संबंधित कंपनियों की जवाबदेही तय करने एवं प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने कहा कि तीन दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है। जिससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। मार्च 2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण समेत कई कार्रवाई शामिल हैं। उन्होंने सभी कार्रवाई खत्म किए जाने की मांग की है। उन्होंने निजीकरण से जहां उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, वहीं सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। जन-जागरण अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया। कहा कि उत्पीड़न और निजीकरण का विरोध जारी रहेगा। इस दौरान जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, मोहम्मद वसीम, राहुल सिंह, राजकुमार मिश्रा, तरंग शर्मा, राजन सिंह, चंद्रेश विश्वकर्मा, शिव किशोर वर्मा आदि मौजूद रहे।