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बकरे की तंदुरुस्ती पर न जाए, अपनी अकल लगाए

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अमरोहा। इस बार बकरीद पर कुर्बानी के लिए पशुओं के बाजार नहीं लग रहे हैं। कुर्बानी के लिए लोग खुद गांव-कस्बे में जाकर पशुओं की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं पशुपालक गली-मोहल्लों में पशु लेकर पहुंचे रहे हैं जो दिखने में तंदुरुस्त और खूबसूरत होते हैं। ग्राहक देखते ही इन बकरों को पसंद कर लेते हैं। पशुपालक बकरों को तंदुरुस्त दिखाने के लिए उसे बेसन और नमक के घोल का पानी पिलाकर बाजार में लाते हैं। इससे इनके पेट फू ले हुए होते हैं। दिखने में वजनी और तंदुरुस्त लगते हैं। जबकि हकीकत में ये पतले-दुबले और बीमार होते हैं। जो घर पर जाकर बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में पशुओं की तंदुरुस्ती पर न जाए, अपनी अक्ल लगाएं। वरना आपकी मुश्किलें बढ़ सकती है।
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तंदुरुस्ती-खूबसूरती से बढ़ जाती है पशुओं की कीमत
अमरोहा। पशु भले ही बीमार हो जाए, लेकिन बेचने वालों से इससे कोई मतलब नहीं है। बस ग्राहक को पसंद आना चाहिए। इसके लिए बेसन का घोल और गेहूं आदि खिलाकर पेट फुला देते हैं। इससे बकरे की खूबसूरती बढ़ जाती है। बेचने वालों को ग्राहक से मुंह मांगी रकम मिल जाती है।
बालों की कटिंग कर पेट बना देते हैं अल्लाह
अमरोहा। ग्राहकों से अधिक दाम वसूलने के लिए खिलाने-पिलाने के अलावा बकरों के बालों की कटिंग में खेल करते हैं। बालों की कटिंग कर पेट पर अल्लाह या मोहम्मद बना देते हैं। इससे बकरों की कीमत अधिक हो जाती है। ग्राहक इस तरह के बकरों के लिए कोई भी कीमत देने को तैयार हो जाते हैं।
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ये करते हैं पशु को तंदुरुस्त दिखाने के लिए
- बेसन का घोल पिलाते हैं
- गेहूं खिलाकर पेट फुला देते हैं
- नाकों में तेल भर देते हैं
- नमक का घोल पिलाते हैं
- पेट में गैस बनाने वाली चीज खिलाते हैं
पशुओं की खरीद को इन बातों पर ध्यान दें
- बकरे को अच्छी तरह से चेक करे
- मुंह खोलकर देखें छाला तो नहीं है
- पेट पर दाने तो नहीं है
- पेट पर हाथ मारकर देखें
- नाकों से पानी तो नहीं आ रहा
- यूरिन का रंग तो बदला नहीं है
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