अमरोहा। देश में नई शिक्षा नीति लागू होने की उम्मीद बढ़ गई है। ऐसा 34 साल के बाद संभव हो पाया है। शिक्षाविदों ने स्वागत किया है। कहा है कि पांचवी कक्षा तक की पढ़ाई, मातृृृृभाषा में होने की छात्रों को अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। वहीं बालक को सीखने में आसानी रहेगी। इसके अलावा जीडीपी के छह प्रतिशत खर्च से कई अन्य तरह के सुधार आ सकेगी। कहा कि कोठारी आयोग की सिफारिश अब अमल में आएगी। हालांकि इन लोगों ने निगरानी तंत्र को बढ़ाने पर जोर दिया है।
नंबर लाने का होड़ खत्म, संस्थानों की निगरानी भी जरूरी
मातृभाषा में पांचवी तक की पढ़ाई अच्छा कदम। स्कूली बच्चों को न तो हिंदी और अंग्रेजी का ज्ञान होता है। वह अंग्रेजी के कविता को रटता है उसके मायने नहीं जान पाता है। हाईस्कूल की परीक्षा खत्म करना बेहतर कदम है। छात्र छात्राओं में नंबर लाने का होड़ खत्म होगा। सरकार को संस्थानों में निगरानी सुनिश्चित करनी होगी है। उल्लंघन पर कार्रवाई जरुरी है। वरना संस्थान बेलगाम हो सकते हैं। बच्चा हिंदी की कविता नहीं जानता है। अंग्रेजी की कविता रटाई जाती है। इसका अर्थ नहीं जानता है। डॉ. संजय शाही, विभागाध्यक्ष, भूगोल,
अंग्रेजी से दूर रह कर विद्यार्थी कैसे करेंगे मुकाबला
पहले से शिक्षा योजना संचालित है। दरअसल शिक्षा व्यवस्था देश की रीढ़ होती है, जो व्यवस्था पहले से चल रही है उससे काफी बदलाव आया है। सॉफ्टवेयर इंजीनियर पूरी दुनिया में भारत से भेजे जाते हैं, लेकिन अब ऐसा क्या हो सकेगा। यह एक बड़ा सवाल है। हमें दुनिया में मुकाबला करना है। आम लोगों को शिक्षा नीति के बारे में जानकारी तक नहीं है। सरकार ने मातृभाषा में शिक्षा देने का ऐलान किया है, हालांकि अंतराष्ट्रीय स्तर पर अव्यवहारिक है। आज अंग्रेजी से कैसे दूर रह सकते हैं। हर चीज अंग्रेजी में उपलब्ध है। डॉ. कमलेश सिंह, स्कूल संचालक
स्नातक में एक साल पर भी सर्टिफिकेट, बेहतर कदम
नई शिक्षा नीति में बजट बढ़ा है। जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च होने से और लाभ मिलेगा। कोठारी आयोग ने छह प्रतिशत की सिफारिश की थी। डिग्री अधूरी रहती थी, स्नातक में एक साल के बाद छोड़ने पर कुछ नहीं मिलता था, लेकिन अब सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री का प्रावधान किया गया है। यह एक अच्छा कदम है। शिक्षा मंत्रालय नामकरण सरकार की प्राथमिकता को साबित करती है। अब रचनात्मक और संरचनात्मक परिवर्तन आएगा। मातृ भाषा को बढ़ावा मिलेगा। डॉ. अशोक रुस्तगी, अध्यक्ष राजनीति विज्ञान
हाईस्कूल में बोर्ड परीक्षा खत्म करने से आगे पड़ेगा असर
उच्च शिक्षा में एमफिल का बंद होना बेहतर है। इससे एक से दो साल का समय बचेगा। अब विश्वविद्यालयों में एक समान नियम लागू होंगे। ऑनलाइन और टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षा पर जोर सराहनीय है। हाईस्कूल में बोर्ड परीक्षा को खत्म करना सही नहीं है। क्योंकि इंटर के पहले छात्र छात्राएं मानसिक तौर पर तैयार हो जाते हैं क्योंकि इंटर के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रमुख दो क्षेत्र मे जाते हैं। इसके लिए छात्र छात्राएं कड़ी मेहनत करते हैं। सीधा असर उच्च शिक्षा पर पड़ सकता है। डॉ. कमर अब्बास, प्रवक्ता, जीव विज्ञान