भले ही सरकार सड़क हादसों को रोकने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। लेकिन, लोगों का रवैया नहीं सुधर रहा है। बिना ड्राइविंग लाइसेंस के सड़कों पर वाहन चलाना शौक भी बन गया है।
यही वजह है कि पिछले साल के सापेक्ष मार्च के महीने में ढाई गुना अधिक बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई हुई है। यही नहीं सैकड़ों अनफिट वाहन भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्कूली वाहन भी बिना मानक चल रहे हैं। मार्च में यातायात और परिवहन विभाग ने 30 स्कूली वाहनों चालान काटे हैं। जबकि, बीते साल मार्च में यह संख्या आधे से भी कम थी।
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई की समीक्षा शासन स्तर से होती है। हर साल दोनों विभागों को रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाती है। पिछले साल मार्च में हुई कार्रवाई के सापेक्ष इस बार मार्च में दो से ढाई गुना अधिक कार्रवाई हुई है। आंकड़ों की बात करें तो पिछले साल मार्च के महीने में बिना लाइसेंस वाहन चलाने वालों की संख्या 467 थी। जबकि, इस बार ढाई गुना अधिक 1269 पहुंच गई है।
परिवहन विभाग और यातायात पुलिस ने वाहनों पर रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप न लगा होने पर भी कार्रवाई की। बीते साल मार्च में यातायात पुलिस ने ऐसे 46 वाहनों के चालान काटे। जबकि इस बार 175 पर कार्रवाई हुई है। ऐसे ही बीते साल यातायात पुलिस ने 10 वाहनों के चालान काटे थे, जबकि इस बार 47 पर कार्रवाई हुई है। बिना मानक चलने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ यातायात पुलिस ने पिछले साल और साल मार्च के महीने बराबर ही चालान काटे हैं।
मोडिफाइड साइलेंसर लगाने वालों पर सख्ती बढ़ी
परिवहन विभाग में पिछले साल आठ वाहनों पर कार्रवाई की थी, जबकि इस बार मार्च के महीने में 27 स्कूली वाहनों के चालान काटे हैं। व्यावसायिक वाहनों में स्पीड लिमिट डिवाइस न लगे होने पर यातायात पुलिस ने 12 और परिवहन विभाग ने 15 पर कार्रवाई की है। पिछले साल मार्च के महीने दोनों विभागों की यह कार्रवाई केवल 12 थी। मोडिफाइड साइलेंसर लगाकर चलने वाले पर भी दोनों विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने नकेल कसी। इसमें यातायात पुलिस ने 22 बाइकों के चालान काटे जबकि परिवहन विभाग में 18 पर कार्रवाई की है।
- यातायात नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। एक बार फिर जल्द अभियान चलाया जाएगा।
- महेश शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन