यह घटना बछरायूं थानाक्षेत्र के मोहल्ला बकाबाद में हुई थी। मोहल्ले में रहने वाले देवीदयाल के परिवार में तीन बेटे संजीव, राजीव व राजेंद्र थे। तीनों भाइयों के बीच बाग के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा था। तीनों भाई पत्नी और बच्चों के साथ अलग-अलग मकान बनाकर रहते हैं।
चार सितंबर 2018 की रात दो बजे राजेंद्र पत्नी देवबाला के साथ घर में सो रहे थे। इस बीच बड़े भाई संजीव व राजीव और परिचित विवेक के साथ सीढ़ी लगाकर राजेंद्र के घर में घुस गए थे और सिर में गोली मारकर राजेंद्र की हत्या कर दी थी।
कमरे में लाइट जली होने के कारण देवबाला ने सभी को पहचान लिया था। इस दौरान संजीव को पकड़ लिया था। लेकिन, वह भी धक्का देकर भाग निकला था। मामले में पुलिस ने मृतक राजेंद्र की पत्नी देवबाला की तहरीर पर पिता देवीदयाल, दो भाइयों राजीव व संजीव समेत पांच के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस ने मुकदमे की विवेचना की तो मृतक के पिता देवीदयाल की नामजदगी झूठी पाई गई थी।
पुलिस ने मृतक के बड़े भाई संजीव, राजीव और उनके परिचित विवेक के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया था। पुलिस को राजीव के कब्जे से 315 बोर का तमंचा बरामद हुआ था। पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल सभी जमानत पर थे।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एससी-एसटी एक्ट संजय चौधरी की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से मजबूत पैरवी की गई। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने प्रकरण में सुनवाई करते हुए साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर सगे भाई संजीव व राजीव को दोषी करार दिया। कोर्ट का फैसला आने के बाद दोनों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। उधर, कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में विवेक को बरी कर दिया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि सजा के प्रश्न पर शनिवार को सुनवाई होगी।
एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर दोषी बने दोनों भाई
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता के मुताबिक इस हत्याकांड में कोर्ट में सुनवाई के दौरान मृतक की पत्नी और गवाह मुकर गए थे। लेकिन, जो तमंचा राजीव के कब्जे से बरामद हुआ, उसी तमंचे से चली गोली के बारूद के निशान मृतक की चोटों पर मिले थे। इसकी पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट में हुई है। इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट ने अहम भूमिका निभाई है। जिसके आधार पर दोनों सगे भाई दोषी पाए गए हैं।
अपने बयानों से मुकर गई मृतक की पत्नी, दर्ज होगा मुकदमा
नए कानून के तहत कई बदलाव हुए हैं। अब मुकदमा दर्ज करने के बाद अपने बयानों से मुकरने वालों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराने का प्रावधान है। इस तरह के मामले में सात से दस साल तक की सजा हो सकती है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में भी मृतक की पत्नी देवबाला अपने बयानों से मुकर गई। नए प्रावधानों के तहत न्यायालय ने उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।