ब्लाक जोया के गांव कूबी में कैंसर ने दो साल के भीतर 10 जिंदगी लील ली है। हैरत की बात यह है कि कैंसर की वजह जानने के लिए प्रशासन ने अभी तक कोई जांच नहीं कराई है। दो महिलाएं अभी भी कैंसर से जूझ रहीं हैं। इनका मेरठ, देहरादून के अस्पतालों में ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन हालत ठीक नहीं हैं। गांव वालों ने हारकर डीएम और विधायक से गुहार लगाई है।
अमरोहा शहर से अतरासी रोड पर सटा गांव कूबी में कैंसर से पहली मौत दो साल पहले राजवीर पुत्र ध्यान सिंह की हुई थी। राजवीर को गले में कैंसर हुआ था। इसके बाद सतवीरी पत्नी हरपाल सिंह की मौत ब्लड कैंसर हो गई। सुरेश पुत्र गंगा राम को भी डेढ़ साल पहले कैंसर ने ऐसा जकड़ा कि वो बच नहीं सका, फिर महेंद्र कौर पत्नी गजेंद्र, रामदुलारी पत्नी सरदार सिंह, बलवीरी पत्नी महेंद्र, मुनेश पत्नी नेमपाल, रामपाल शर्मा पुत्र डुंगर सिंह के अलावा डेढ़ माह पूर्व जनम सिंह पुत्र रामचंद्र और आठ दिन पूर्व कमला पत्नी समरपाल सिंह की कैंसर से मौत ने पूरे कूबी गांव को झकझोर कर रख दिया है।
एक-एक करके दस लोगों की कैंसर से मौत के बाद गांव वाले सदमे में हैं। ग्राम प्रधान अंशु चौधरी ने अब इस मामले की जानकारी क्षेत्रीय विधायक अशफाक अली खां को दी है। इसके बाद अशफाक अली ने डीएम से बात की, लेकिन अभी कोई जांच नहीं कराई गई है।
पानी की वजह से तो नहीं फैल रही बीमारी
गांव के हरपाल की पत्नी सुरेश देवी और तेजपाल सिंह की पत्नी वीरवती भी कैंसर से पीड़ित हैं। वीरवती को आंख में कैंसर होने के कारण डाक्टर उनकी एक भौंह को काटकर निकाल चुके हैं, फिर भी कैंसर काबू में नहीं हैं। सुरेश देवी मेरठ, देहरादून के डोईवाला में इलाज करा रहीं हैं। लेकिन कैंसर का खतरा कम नहीं हो रहा है। गांव वाले भयभीत हैं और गांव के पानी को ही कैंसर होने का कारण मान रहे हैं।
कोई एक तरह का नहीं है कैंसर
गांव कूबी में लोगों को हो रहा कैंसर कोई एक तरह का नहीं हैं। किसी के पेट में कैंसर था, तो किसी को छाती का कैंसर, किसी को ब्लड कैंसर तो किसी के गले में कैंसर होने से मौत हुई। आंखों में, हड्डी में तो किसी को त्वचा में कैंसर होने की जानकारी ग्रामीणों को इलाज के दौरान संबंधित अस्पतालों के डाक्टरों ने दी।
भयभीत गांव वालों ने हैंडपंप का पानी छोड़ा
गांव वाले भयभीत होकर हैंडपंप का पानी छोड़ चुके हैं। वे या तो इंडिया मार्का वाले अधिक गहराई के हैंडपंपों का पानी पी रहे हैं या फिर सबमर्सिबल लगवा लिए हैं। ग्राम प्रधान के ससुर मायाराम का कहना है कि गांव के घरों में लगे निजी नल तो ठप हो गए हैं। डर के मारे लोग पानी नहीं पी रहे हैं।
पूरा गांव कैंसर से निजात की मांग कर रहा
गांव के माया राम कहते हैं कि हमारी पुत्रवधू अंशु चौधरी ग्राम प्रधान है, दो महीने से जब से हमने प्रधानी का चार्ज लिया है। लगातार गांव में कैंसर से हुई मौतों का कारण जानने के लिए अधिकारियों को शिकायत दे रहे हैं। गांव वाले यह जानना चाहते हैं कि आखिर कैंसर क्यों फैल रहा है। क्या गांव के पानी में कोई कमी है। सरकार गांव के हैंडपंपों के पानी की जांच कराए।
कूबी गांव के देवेंद्र सिंह कहते हैं कि हमारी चाची की कैंसर से मौत हो गई। गांव का पानी खराब है तो गांव वाले पानी पीना छोड़ चुके हैं। इंडिया मार्का हैंड पंप का ही पानी पी रहे है।
गांव के सुरेश का कहना है कि कैंसर से जब मौत होती है तो पूरा गांव सहम जाता है। अब गांव वाले आवाज उठाने को तैयार हो गए हैं। गांव में हर कोई डरा हुआ है।
गांव के रूपलाल का कहना है कि कैंसर से मौत हो रही हैं, यह बात तो इलाज हुआ तो डाक्टरों ने साबित कर दी। कैंसर हो क्यों रहा है. गांव की मिट्टी में कमी है या पानी में समझ नहीं आ रहा।
कहीं वाशिंग प्लांट का तो असर नहीं
कूबी गांव अमरोहा से ज्यादा दूर नहीं हैं। अमरोहा शहर और इसके आसपास दाउद सराय रोड पर भी काटनवेस्ट के वाशिंग प्लांटों में केमिकल से कत्तरों की धुलाई हो रही है। इस केमिकल के पानी को बोरिंग करके जमीन के भीतर डाला जाता है। कहीं यह वाशिंग प्लांटों का पानी ही तो भू गर्भ में जाकर कैंसर का कारण नहीं बन रहा है। यह जांच का विषय है। इन वाशिंग प्लांटों को प्रशासन के अधिकारी शासन का आदेश आने के बाद भी बंद नहीं करा सका है।