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निजी संस्था दौड़ा रही डीएम साहब की एंबुलेंस!

Tue, 13 Dec 2016 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला, अागरा
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जिले की सड़कों पर डीएम की एंबुलेंस फर्राटे भर रही है, मगर साहब इससे बेखबर हैं। परिवहन विभाग में बाकायदा डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट के नाम टाटा विंगर एंबुलेंस दर्ज है, जिसका फिटनेस सर्टिफिकेट दिसंबर 2015 को एक्सपायर हो चुका है। हैरानी की बात ये है कि सरकारी नंबर की ये एंबुलेंस एक निजी संस्था के अंडर में है। किस मद या निधि से गाड़ी मिली है, इसका भी पता नहीं है। बहरहाल जिलाधिकारी की ये एंबुलेंस और उसका सरकारी सिरीज का नंबर हरेक शख्स की आंखों को चौंका रहा है। 
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7 दिसंबर 2013 को परिवहन विभाग में यूपी 23 जी-0184 का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिसका चेसिस नंबर एमएटी 460124 डीयूजे 05255 है। इंजन नंबर 483 डीएलटीसी 55 जेडब्ल्यूवाई 708708 है। ऑनर नेम के आगे केवल डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट अमरोहा लिखा है। वाहन एंबुलेंस है, जबकि फ्यूल टाइप के आगे डीजल लिखा है। 

मेकर मॉडल टाटा मोटर्स लिमिटेड, वन टाटा विंगर डीएक्स है। एंबुलेंस की एफसी 6 दिसंबर 2015 दर्ज है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह एंबुलेंस एक निजी संस्था के पास है। शहर ही नहीं बल्कि दूसरे जिलों तक में साहब की एंबुलेंस चक्कर लगाती रहती है, मगर जिलाधिकारी अपनी गाड़ी से अनभिज्ञ हैं।
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उसका फिटनेस सर्टिफिकेट भी खत्म हो गया है, किंतु गाड़ी की सीरीज सरकारी है। इसलिए कोई भी उसको रोकने व टोकने की हिम्मत नहीं जुटाता है। कहा जाए तो एंबुलेंस बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के ही चक्कर काट रही है। किस निधि या मद से उसको खरीदा गया है, इसकी जानकारी नहीं है। गाड़ी कौन चला रहा है, इसकी साहब ने मामला संज्ञान में आने पर जरूर पड़ताल कर स्थिति दिखवाने की बात कही है। ताज्जुब इस बात का है कि लोग भी गाड़ी का नंबर देखकर हैरत में पड़ जाते हैं। 

अगर मेरे नाम एंबुलेंस दर्ज है तो हो सकता है कि किसी विधायक या सांसद निधि से उसको खरीदा गया होगा। इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन हुआ होगा। शहर में चल रही है या नहीं, इसकी जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही मसले में अगला कदम उठाया जाएगा।वेद प्रकाश, जिलाधिकारी
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