जिलाधिकारी सोमवार दोपहर अचानक एआरटीओ कार्यालय पहुंच गईं। अचानक छापे से कार्यालय में अनाधिकृत रूप से घुसे लोगों और दलालों में हड़कंप मच गया और भगदड़ की स्थिति मच गई। कार्यालय के दोनों गेट बंद करा डीएम ने अंदर मिले संदिग्ध लोगों को लाइन में खड़ा करा दिया। सभी की आईडी के साथ अभिलेख मिलाए गए।
इस दौरान लगभग 14 लोग संदिग्ध मिले, जिन्हें पूछताछ के लिए कलक्ट्रेट लाया गया। बंद कमरे में उनसे पूछताछ की गई। मामले में क्या कार्रवाई हुई है, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन कार्रवाई से पूरे दिन एआरटीओ कार्यालय में हड़कंप की स्थिति रही।
एआरटीओ कार्यालय पर दलालों के हावी रहने की बात जगजाहिर है। मामले को लेकर शिकायत भी होती रहती है। सोमवार दोपहर डीएम अचानक लाव लश्कर के साथ अतरासी रोड स्थित एआरटीओ कार्यालय पर पहुंची। उनके साथ एसडीएम नौगावां संजीव यादव और डिप्टी कलेक्टर गंभीर सिंह भी थे।
डीएम के पहुंचे ही कार्यालय में हड़कंप मच गया। अंदर पहुंचते ही डीएम ने कार्यालय के दोनों गेट को बंद करा यहां अपनी सिक्योरिटी तैनात करा दी। अंदर घूम रहे 30-35 संदिग्ध लोगों को एक लाइन में खड़ा करा दिया गया। एक-एक कर पूछताछ के साथ सभी के अभिलेख चेक किए गए और तलाशी ली गई।
संदिग्ध लोगों को एक तरफ खड़ा करा दिया गया और सही मिले लोगों को छोड़ दिया गया। कार्यालय के अभिलेख भी चेक किए गए और पूछताछ भी की गई। इस दौरान कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के पसीने छूटते रहे।
डिप्टी कलेक्टर गंभीर सिंह को पूछताछ के बाद संदिग्ध मिले लगभग 14 लोगों को अपने साथ कलक्ट्रेट लाने की बात कह डीएम वहां से निकल गई। पीछे से संदिग्ध मिले में इन लोगों को बस में लेकर डिप्टी कलेक्टर गंभीर सिंह और एसडीएम धनौरा संजीव यादव कलक्ट्रेट लेकर पहुंचे। यहां गंभीर सिंह के बंद कार्यालय में सभी से कड़ाई से पूछताछ की गई। हालांकि पूछताछ के बाद क्या कार्रवाई हुई अभी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।