अमरोहा। चीनी मिलों के पास डिस्टिलरी लगाने के लिए तो करोड़ों रुपये हैं लेकिन, जब किसानों के गन्ने का बकाया भुगतान करने की बात आती है तो खुद घाटे में होने का रोना रोकर किसानों बकाया देने से कतरा रही हैं। चीनों मिलों के मालिकान किसानों को पैसा रोक कर उनका शोषण कर रहे हैं। आज किसान अपने ही पैसे के लिए भटक रहा है और चीनी मिलों का चक्कर काट रहा है। यह बात क्षेत्रीय सांसद कुंवर दानिश अली ने शुक्रवार को गन्ना किसानों के बकाया राशि भुगतान करने को लेकर यह मुद्दा उठाया और जवाब मांगा। उन्होंने कहा, गन्ना किसानों का बकाया वरीयता के आधार पर होना चाहिए। डिस्टिलरी का काम तो बाद में भी हो सकता है लेकिन, गन्ना का भुगतान न होने से किसान आगे कुछ भी नहीं कर पा रहा है।
दानिश ने लोक सभा में आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का मुद्दा बड़े जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने कहा, अमरोहा लोकसभा क्षेत्र में किसानों की बहुत बड़ी आबादी रहती है। क्षेत्र में स्थित एक शुगर मिल गन्ना किसानों के बक़ाया रक़म की अदायगी नहीं कर रही है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है और अभी तक पिछले साल की रक़म भी अदा नहीं की गयी है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि यह मिलें घाटे में चल रही हैं। शुगर फ़ैक्टरी के पास डिस्टिलरी है। वहीं दूसरी चीनी मिल नई डिस्टिलरी बना रही है। इन पर किसानों का 400 करोड़ रुपये बाक़ी है।