गजरौला (अमरोहा)। ससुराल में युवती का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। सूचना मिलने पर परिजन पहुंच गए। आरोप है कि ससुराल वालों ने शव को दिखाने से इनकार कर दिया। इस पर वहां जमकर हंगामा हुआ। थाना पुलिस भी आ पहुंची। बाद में मृतका के शव को सीएचसी लाया गया। यहां ससुराल वालों और मायके वालों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। मायके वालों ने उसकी हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया और उसके देवर को पीट दिया। वहीं मौजूद पुलिसकर्मियों ने बमुश्किल उसे छुड़ाया और गुस्साए लोगों को समझाबुझाकर शांत कराया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
नगर के मोहल्ला जलाल नगर निवासी शान मोहम्मद की बेटी रजिया (21) का निकाह लगभग 20 माह पूर्व नगर में स्टेशन रोड पर रहने वाले इसहाक के पुत्र जावेद से हुआ था। बताते हैं कि रिश्ता तय होने के बाद से ही दोनों परिवारों के बीच तनाव चल रहा था। शादी भी हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी। इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हुए। मायके वालों के मुताबिक रजिया को ससुराल में तंग किया जाता था। वह कई बार मायके आ गई। बाद में पंचायतों के माध्यम से पुलिस के समझाने पर उसे ससुराल भेज दिया। शाम लगभग पांच बजे रजिया ने अपने पिता को फोन पर बताया कि वह परेशान है। ससुराल वाले उसे पीट रहे हैं। इसके बाद शान मोहम्मद ने विवाद से बचने के लिए खुद जाने की बजाए अपनी रेहाना और पुत्र सुल्तान को बेटी की ससुराल भेज दिया। शान मोहम्मद के मुताबिक पत्नी और पुत्र वहां पहुंचे तो बेटी का शव कमरे में फांसी के फंदे पर झूलता मिला। सूचना मिलने पर वह भी रिश्तेदारों और मोहल्ले के लोगों को लेकर वहां जा पहुंचे। मायके वालों के हत्या का आरोप लगाने पर वहां हंगामा हो गया। पुलिस भी आ पहुंची। बाद में रजिया के शव को सीएचसी लाया गया। यहां भी जमकर हंगामा और मारपीट हुई। मायके वाले रजिया की हत्या किए जाने का आरोप लगा रहे थे जबकि ससुराल वाले इससे इनकार कर रहे थे। रात नौ बजे इंस्पेक्टर आरपी शर्मा ने बताया कि मायके वालों की तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की जा रही है।
बेटी को नहीं भेजते तो शायद बच जाती जान
गजरौला। सीएचसी में बेटी का शव देखकर फफक रहे रजिया के माता-पिता ने बताया कि पंचायत के फैसले के बावजूद बेटी को ससुराल भेजने से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। बेटी के भविष्य और समाज की खातिर उन्होंने पुलिस के कहने पर उसे भेज दिया। उन्हें हर पल अपनी बेटी की जान का डर सताता रहता था। रो-रोकर बेहाल हुए जा रहे माता-पिता बार-बार अपनी बच्ची की हत्या किए जाने का आरोप लगा रहे थे। इनका कहना था कि यदि वे रजिया को ससुराल नहीं भेजते तो शायद उसकी जान बच जाती।