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दीपदान : छलकती आंखें बयां कर रहीं थी अपनों का दर्द

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तिगरीधाम (अमरोहा)।
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कार्तिक पूर्णिमा की पूर्व संध्या और चतुर्दशी के अवसर पर जहां तिगरीधाम दीपदान के बाद जगमगा गया, वहीं अपनों से बिछड़ों का दर्द भी छलकती आंखों में साफ दिखा। जिनमें कुछ मासूम ऐसे भी थे, जिन्होंने कम उम्र में ही अपनों को खो दिया।
उनकी छलकती आंखों में दीपदान के वक्त अपनों के खोने का दर्द देख परिजन भी बिलखते नजर आए। बृहस्पतिवार शाम चतुर्दशी के अवसर पर जहां सूरज की किरणें डूब रहीं थीं, वहीं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को रेला नम आंखों के साथ दीपदान करने को उमड़ पड़े। कुछ परिवार एक मासूमों के साथ पहुंचे, जिन्होंने अपने मां, भाई या बहन को खो दिया था। काफी कम उम्र में यह पल उनके लिए अलग अहसास देने वाला था।
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बहन की याद में किया दीपदान
जिले के डिडौली गांव निवासी डालचंद की 20 वर्षीय पुत्री विनीता की छह माह पूर्व बीमारी के चलते मौत हो गई थी। तब विनीता के अंतिम संस्कार हुआ तो नौ वर्षीय छोटे भाई वंश ने मुखाग्नि दी थी। वंश बृहस्पतिवार शाम अपने पिता व परिवार के साथ गंगा घाट पहुंचे और दीपदान किया। उसके चेहरे पर बहन को खोने का गम साफ झलक रहा था। दीपदान करते हुए परिवार के लोगों ने उसे इस संस्कार के बारे के बारे में बताया।
मां को याद कर भर आईं शुभ की आंखें
तिगरीधाम में संभल शहर के मोहल्ला मिट्ठी सराय निवासी जयकिशन अपने 11 वर्षीय बेटे शुभ के साथ पहुंचे। अक्तूबर माह में शुभ की मां नीतू की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। शुभ जब पिता के साथ गंगा में दीपदान कर रहे थे मां की याद आंखें छलक आईं। कम उम्र में मां को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। पिता उसको समझाते रहे।
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छोटे भाई को याद कर किया दीपदान
मुरादाबाद के गुलाबबाड़ी रेलवे फाटक के समीप निवासी राजकुमार के 12 वर्षीय बेटे प्रिंस की सर्पदंश से मौत हो गई थी। उनके बड़ा बेटा अमन गंगा घाट पहुंचा। यहां छोटे भाई को याद कर बड़ा भाई रो पड़ा। नम आंखों के साथ पिता ने दीपदान कराया। दीपदान संस्कार ने कम उम्र में बड़ा होने का अहसास करा दिया।
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