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कोरोना के डर से बेटे को आखिरी बार देख भी नहीं पाएंगे बेबस माता-पिता

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गजरौला(अमरोहा)। बूढ़े माता-पिता का सहारा उनकी एकलौती औलाद उन्हें रोता-बिलखता छोड़ गई। बेबसी का आलम यह कि कोरोना संक्रमण के डर और आनेजाने में होने वाली तकलीफ के चलते वे अपने इकलौते बेटे को आखिरी बार देख भी नहीं सकेंगे। लिहाजा बेबस मां के अनुरोध पर पुलिस ने ही उसके अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया है। शुक्रवार को अमरोहा में उसकी अंत्येष्टि कर दी जाएगी। इसके फोटो पुलिस व्हाट्सएप पर परिजनों को भेजेगी। इतना ही नहीं बाद में उसकी अस्थियां भी कश्मीर भिजवाई जाएंगी।
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गुरुवार को थाने में मौजूद ब्रजघाट चौकी इंचार्ज एसआई मोहित बालियान ने बताया कि एक जुलाई को गांव ओसीताजगदेपुर के पास मिले युवक के शव का शुक्रवार को अमरोहा में अंतिम संस्कार कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि मृतक के घर में बूढ़ी मां और मनोरोगी पिता हैं। बहन-भाई अथवा कोई रिश्तेदार तक नहीं हैं। यही वजह है कि बूढ़े और बेबस माता-पिता ने कोरोना संक्रमण के चलते सैकड़ों किलोमीटर दूर यहां आने में असमर्थता जताई। फोन पर रो-रोकर बेहाल हो रही मृतक की मां ने उनसे अनुरोध किया कि पुलिस ही उसका अंतिम संस्कार करा दें। इसके लिए वह खर्च की रकम भी भेजने को तैयार थीं। लेकिन चौकी इंचार्ज ने मना कर दिया। एसआई मोहित बालियान ने बताया कि शव मोर्चरी में रखा हुआ है। अंत्येष्टि के फोटो व्हाट्सएप कर देंगे। बाद में अस्थियों को कूरियर से कश्मीर भिजवा देंगे। बता दें कि एक जुलाई को गजरौला-ब्रजघाट के बीच कांकाठेर रेलवे स्टेशन के पास शाम को एक युवक का शव ट्रैक के पास पड़ा मिला था। सूचना मिलने पर पहुंची गजरौला थाने की ब्रजघाट चौकी पुलिस ने शव की तलाशी ली तो जेब में मिले आधार कार्ड से उसकी शिनाख्त विजय पुत्र प्रेमचंद निवासी गांव माली जिला ऊधमपुर (जम्मू-कश्मीर) के रूप में हुई थी। पुलिस ने उसके परिजनों को सूचित कर शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था। परिजनों ने पुलिस के बताया था कि विजय बरेली में नौकरी करता था। घर आते समय रास्ते में ट्रेन से गिर गया होगा।
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