सैदनगली थाना क्षेत्र के झुंडी माफी में दो नाबालिग सगी बहनों आत्महत्या की बात गले नहीं उतर रही है। ग्रामीणों की चुप्पी और आनन-फानन में शवों का अंतिम संस्कार करना कई सवालों को जन्म दे रहा है। आखिर दोनों बहनों में एक साथ आत्महत्या की बात कैसे आई। कहीं ऐसा तो नहीं कि हत्या के बाद शवों का लटकाया गया हो। इन कई सवालों के जवाब मिल सकते थे, लेकिन पुलिस की हीलाहवाली से पूरे मामले में पर्दा पड़ गया।
थाना क्षेत्र के झुंडी माफी गांव निवासी रामप्रकाश खड़गवंशी की बेटी दयावती (11) व धर्मवती (13) की लाश गांव से एक किमी दूर आम के बाग में पेड़ से लटकती मिली। पुलिस और परिजनों की कहानी पर विश्वास करें तो पिता की डांट और पिटाई से क्षुब्ध होकर दोनों ने जान दे दी। काफी देर तक मामले को दबाए रखना और पुलिस को जानकारी न देना और गांववासियों की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है।
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आखिर ऐसा कैसे हो सकता है दोनों नाबालिग बच्चों के दिमाग में एक साथ आत्महत्या करने की बात आई होगी। आत्महत्या के लिए दोनों ने आम के बाग को ही क्यों चुना? घर से इतनी दूर आने की क्यों सोची। कहीं ऐसा तो नहीं कि दोनों बहनों के साथ कोई अनहोनी हुई हो। इसके बाद हत्या करने के बाद आत्महत्या का स्वरूप देने के लिए बाग में लटका दिया गया हो। बाद में मामले को छुपाने के लिए जल्दी जल्दी अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस और ग्राम प्रधान मोबाइल पर लगातार संपर्क में थे। ऐसे में पुलिस चाहती तो अंतिम संस्कार को रुकवा भी सकती थी। घटना की सूचना के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाई होती और अंतिम संस्कार रोक दिया होता तो पोस्टमार्टम में कई बातों का खुलासा हो सकता था। लेकिन एक तो पुलिस घटनास्थल और गांव में ही लेट पहुंची। इसके बाद अंतिम संस्कार स्थल तक जाने की जहमत भी नहीं उठाई। पोस्टमार्टम होता तो कई बातों का खुलासा हो सकता था।