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Amroha News: हर साल करोड़ों रुपये पर फिर रहा पानी फिर भी सरकारी हैंडपंपों के हलक सूखे

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अमरोहा। करीब एक दशक पहले तक जो सरकारी हैंडपंप शहर से लेकर गांव तक लोगाें की प्यास बुझाने का जरिया हुआ करते थे, आज वह जिम्मेदारों की अनदेखी के भेंट चढ़ गए हैं। हर साल सरकारी हैंडपंपों के रीबोर या नए लगाने के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाते हैं, लेकिन हैंडपंपों का हलक सूखा हुआ है।
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शहर से लेकर गांव तक तमाम हैंड पंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंप पीला पानी उगल रहे हैं। यह पानी पीने योग्य नहीं हैं। लोग बीमार पड़ रहे हैं। शहर में राहगीरों को जरूरत पड़े तो बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है। सवाल ये है कि गर्मियों में लोगों की प्यास कैसे मुझेगी।
जनपद में छह ब्लॉक और 578 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें करीब 30 हजार से ज्यादा इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगाए गए थे। ग्रामीण इलाकों में पेयजल की निजात दिलाने को सरकारी हैंडपंप ही सहारा हैं। इस बार गर्मी में शायद इतने हैंडपंप भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पाएंगे, क्योंकि जिले के तमाम क्षेत्रों में रिपेयर और रीबोर नहीं होने के कारण सैकड़ों हैंडपंप ठप पड़े हैं। हजारों हैंडपंप ऐसे है जो छोटी-छोटी खराबी के कारण ठप पड़े हैं।
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केवल हसनपुर और गंगेश्वरी विकास खंड के अधिकांश गांवों में सरकारी हैंडपंप की हालत खराब है। ज्यादातर हैंडपंप से हत्था और अंदर लगी चेन गायब है। कुछ जगह हैंडपंप कूड़े के ढेर में समाने लगे हैं। अमरोहा शहर के कल्याणपुरा रोड पर खड़ा हैंडपंप खराब है। उसका चबूतरा भी टूटा पड़ा है। मिनी स्टेडियम में खड़ा हैंडपंप भी जवाब दे गया है। इसके अलावा सिकरौली मिलक, बाईखेड़ा, गंगाचोली, भैंसरोली रुद्रपुर, जयतौली, चकफेरी तरौली, खेलिया खालसा, ओगपुरा आदि गांव में हैंडपंप खराब पड़े हैं।
साफ है कि इस बार पड़ने वाली भीषण गर्मी में लोगों को पेयजल के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। सरकारी हैंडपंप लोगों की पानी की जरूरत के लिए नाकाफी साबित होंगे। ऐसे में अगर सिस्टम नहीं जागा, तो पानी के लिए त्राहि-त्राहि मचना स्वाभाविक है।
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