अमरोहा। हर साल सड़कों को सुधारने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते है लेकिन जिलेभर की सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे है। सड़कों पर जलभराव पर जाम की समस्या से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे होते हैं। कई बार जान भी चली जाती है। बारिश होते ही शहर सहित जिलेभर की सड़कें तालाब बन जाती हैं।
हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। यह स्थिति शहर से लेकर गांव तक की सड़कों की है। कागजों में गड्ढा मुक्त जनपद की सड़कों की हकीकत बिल्कुल उलट है। सड़कों पर चलना जोखिम भरा है। बारिश का पानी भर जाने से सड़कों के गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं।
कई बार चार पहिया वाहन भी गड्ढों में फंस जाते हैं जबकि बाइक सवार अक्सर गिरकर चोटिल होते रहते हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग का गड्ढा मुक्ति अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित है। कदम-कदम पर बने गड्ढे इसकी गवाही दे रहे हैं, जबकि, शहर में सड़क निर्माण और मरम्मत समेत देखभाल के लिए तीन विभाग की जिम्मेदारी है। इसमें नगर पालिका, पीडब्लूडी और एनएच विभाग शामिल है। तीनों विभाग सड़क निर्माण और मरम्मत पर सलाना कराेड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।
बावजूद इसके सड़कें गड्ढा मुक्त नहीं हो पाती हैं। मंगलवार को मंडी धनौरा क्षेत्र में सड़क में बने गड्ढे में बाइक का पहिया गिरने से घायल व्यक्ति की मौत हो गई। यहीं स्थिति शहर में जलभराव की है। अगर हल्की बारिश हो जाए तो सड़कों पर जलभराव हो जाता है। हर साल नाला सफाई पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी सड़कें तालाब बन जाती हैं। बाजार बटवाल व कोट की दुकान नहीं खुल पाती हैं। कई घरों और दुकानों में पानी भर जाता है। पानी से निकलते समय बाइक और कार बंद भी बंद हो जाती हैं। इसके अलावा रेलवे स्टेशन रोड, बिजनौर मार्ग, कल्याणपुर मार्ग, चौब, नल, आवास विकास, दानिशमंदान, आंबेडकर पार्क, लकड़ा चौराहा सहित दर्जनों मोहल्लों की सड़कें पानी से लबालब भर जाती हैं। जिसके कारण लोगों को घरों से निकलने में परेशानी होती है। घंटों लोग अपने ही घरों में कैद रहने को मजबूर रहते हैं।
नासूर बनी शहर में जाम की समस्या, ई-रिक्शा बड़ा कारण
रूट निर्धारित होने के बाद भी ई-रिक्शा चालक मनमर्जी से दौड़ा रहे हैं। जिस कारण शहर में जाम लग जाता है। मोहल्ला लकड़ा, बड़ा बाजार, अतरासी चौराहा और कोट बाजार के हालात ज्यादा खराब रहते हैं। ई-रिक्शा चालकों के मनमानी के कारण जाम की स्थिति बनती है। इसके बावजूद समस्याओं को देखकर भी जिम्मेदार अंजान बने रहते हैं। शहर में बनी जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए ऑटो व ई-रिक्शा संचालन के लिए शहर में 13 रूट निर्धारित कर किए गए थे। दावा किया था कि सुबह आठ से रात आठ बजे तक इसी रूट पर ऑटो और ई-रिक्शा का संचालन होगा। इसके लिए यातायात पुलिस ने ऑटो, ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन कर रूट निर्धारित किया। अनदेखी और रूट बदलने वाले चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही गई थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जिम्मेदार रूट निर्धारित कराना भूल गए तो चालकों ने मनमानी शुरू कर दी।